देवउठानी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। पुराणों के अनुसार आज ही के दिन सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु चार महीने तक सोने के बाद देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु शालीग्राम रूप में तुलसी से विवाह करते है इसी कारण इसे तुलसी विवाह भी कहा जाता है। मान्यता है कि आज ही के दिन से सारे मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, नामकरण, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश शुरू हो जाते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार देवउठनी एकादशी या तुलसी विवाह कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। मान्यता ये भी है कि इस दिन देवउठनी एकादशी व्रत कथा सुनने से 100 गायों को दान के बराबर पुण्य मिलता है। इस दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है। इस एकादशी का व्रत करना बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है। आज के दिन सुबह स्नान करके नए वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प करना चाहिए। साथ ही घर के आंगन में शालिग्राम और तुलसी विवाह पूरे विधि-विधान के साथ करना चाहिए। और फिर रात के समय घर के बाहर और पूजा स्थल पर दीपक जरूर जलाना चाहिए साथ ही संध्या आरती करना ना भूलें। आज के दिन ब्राह्मणों को दान देने की भी परंपरा है।
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