Trump on Iran War: ट्रंप के ‘बिना शर्त सरेंडर’ पोस्ट से इजराइल-ईरान युद्ध में सीजफायर की अटकलें तेज हो गई हैं. पिछले साल भी ऐसी ही घोषणा के 6 दिन बाद सीजफायर हुआ था. हालांकि, मौजूदा संघर्ष ज़्यादा बड़ा और कई देशों में फैल चुका है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल हुई 12 दिनों की जंग के दौरान एक पोस्ट किया था, “बिना शर्त सरेंडर” जिसके ठीक 6 दिन बाद इजराइल-ईरान में सीजफायर हो गया था. शुक्रवार को टूथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, “ईरान के साथ बिना शर्त सरेंडर के अलावा कोई डील नहीं होगी! ट्रंप के पोस्ट के बाद फिर से अटकलें लगने लगी हैं कि 6 दिनों बाद कहीं इस जंग का अंत तो नहीं हो जाएगा, क्या ये सीजफायर का हिंट तो नहीं है.
ट्रंप ने पोस्ट में आगे लिखा, “उसके बाद और एक महान और स्वीकार्य लीडर के चुनाव के बाद, हम और हमारे कई शानदार और बहुत बहादुर साथी और पार्टनर, ईरान को बर्बादी के कगार से वापस लाने के लिए बिना थके काम करेंगे, इसे आर्थिक रूप से पहले से कहीं ज़्यादा बड़ा, बेहतर और मज़बूत बनाएंगे. ईरान का भविष्य बहुत अच्छा होगा. ईरान को फिर से महान बनाओ (MIGA!).”
पोस्ट के 6 दिन बाद सीजफायर
17 जून 2025 को ट्रंप ने इजराइल और ईरान के बीच बारह दिन के युद्ध के दौरान यही मांग की थी. छह दिन बाद, 23 जून को, उन्होंने ऐलान किया कि सीजफायर समझौता हो गया है. बता दें, इस सीजफायर के लिए अमेरिका के साथ कतर ने मध्यस्थता की थी. अगर यही पैटर्न रहा, तो 12 मार्च तक सीजफायर का ऐलान हो सकता है.
पिछली जंग से बड़ी है हालिया जंग
हालांकि दोनों मौकों में काफी फर्क है. मौजूदा लड़ाई बारह दिन की लड़ाई से काफी ज़्यादा बड़ी है, यह एक दर्जन से ज़्यादा देशों में फैल गई है. जिससे गल्फ़ एनर्जी एक्सपोर्ट में रुकावट आई है, साथ ही कई अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद तेहरान बदले की आग में जल रहा है. पिछले जंग की बाद करें, तो वह ज्योग्राफ़िकल और पॉलिटिकल तौर पर कहीं ज़्यादा कंट्रोल में थी.
ईरान भी इस बार जंग रुकवाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है. राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने विरोध वाला लहज़ा अपनाते हुए कहा कि बीच-बचाव करने वाले देशों को अपना दबाव उन लोगों पर डालना चाहिए जिन्होंने ईरानी लोगों को कम आंककर आग लगाई है.
क्या खाड़ी देश इस बार मध्यस्तथा के लिए आगे आएंगे?
फिर सवाल कतर पर आता है, जो पिछले जंग में मध्यस्त था, लेकिन अभी वह अपना संकट खुद ही संभाल रहा है. ईरानी ड्रोन हमले के बाद जब उसकी रास लफ़ान फैसिलिटी पर हमला हुआ, तो उसने LNG एक्सपोर्ट पर फ़ोर्स मेज्योर घोषित कर दिया. क्या वह फिर से वही बीच-बचाव की भूमिका निभाने के लिए बैंडविड्थ और स्थिति बनाए रख पाएगा, यह एक खुला सवाल है. 12 मार्च को 5 दिन बाकी हैं, लेकिन सीजफायर के लिए कोई खुलकर आगे नहीं आ रहा है.

