Trump Global Tariff

Trump Global Tariff: ग्लोबल टैरिफ सिर्फ 150 दिन के लिए ही क्यों लगाया गया? यहां समझिए

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी बताते हुए रद्द कर दिया. इसके बाद ट्रंप ने नए कानूनी प्रावधान के जरिए 10% ग्लोबल टैरिफ लागू कर दिया है. आइए जानते हैें कि ट्रंप का यह टैरिफ सिर्फ 150 दिन के लिए ही क्यों वैध रहेगा. ट्रंप प्रशासन ने तीन अलग-अलग कानूनी रास्तों पर का सहारा लिया. इन्हें भी समझेंगे.

सेक्शन 122 क्या है?
सेक्शन 122, अमेरिका के 1974 के ट्रेड एक्ट का हिस्सा है. यह राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि वे किसी भी या सभी देशों पर अधिकतम 15% तक टैरिफ लगा सकते हैं, अगर अमेरिका को बड़े और गंभीर बैलेंस ऑफ पेमेंट (भुगतान संतुलन) संकट का सामना करना पड़ रहा हो. इस प्रावधान के तहत टैरिफ लगाने के लिए किसी जांच की जरूरत नहीं होती और न ही ज्यादा कानूनी प्रक्रिया की बाध्यता होती है.
लेकिन यह टैरिफ सिर्फ 150 दिनों तक ही लागू रह सकता है. 150 दिन पूरे होने के बाद इसे आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होती है. अगर कांग्रेस इसे बढ़ाने के पक्ष में वोट नहीं करती, तो सेक्शन 122 के तहत लगाए गए टैरिफ अपने आप खत्म हो जाएंगे. खास बात यह है कि इस सेक्शन का पहले कभी इस्तेमाल नहीं हुआ था.

सेक्शन 301 क्या है?
सेक्शन 301 भी 1974 के ट्रेड एक्ट का हिस्सा है. इसके तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जांच करता है कि कही कोई देश अमेरिका से साथ गलत ट्रेड प्रैक्टिस तो नहीं कर रहा. इसके तहत जवाबी टैरिफ लगाया सकता है. ट्रंप के नए ऐलान के बाद सेक्शन 301 के तहत कोई नई जांच शुरू नहीं की गई है, फिर भी ट्रंप के सामने यह विकल्प भी खुला है. भारत के डिजिटल सर्विस टैक्स को लेकर पहले सेक्शन 301 के तहत विवाद हुआ था, जिसे 2021 में OECD समझौते के बाद सुलझा लिया गया.

सेक्शन 232 क्या है?
सेक्शन 232, 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट का हिस्सा है. अगर कोई आयात राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाए, तो वाणिज्य मंत्री की सिफारिश के बाद इस कानून के तहत टैरिफ लगाया जा सकता है. ट्रंप ने पहले भारत सहित कई देशों पर इसी सेक्शन के तहत टैरिफ लगाए थे, जिनका असर स्टील, एल्यूमीनियम और कुछ ऑटो पार्ट्स पर पड़ा. हाल ही में अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के बाद कुछ टैरिफ हटाए गए और ऑटो पार्ट्स पर रियायती कोटा दिया गया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने साफ किया है कि वे टैरिफ दबाव बनाए रखने के लिए दूसरे कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे.

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