Indore Water Contamination News: देश के सबसे साफ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने के बाद अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी. देश के सबसे साफ शहर में पानी वाला जहर कहर मचा रहा है. अब सवाल है कि आखिर इंदौर में मातम क्यों छाया, दूषित पानी से मौत और हजारों लोगों के बीमार होने के हालात क्यों बने? आखिर यह किसकी गलती है? यह तो होना ही था. क्योंकि स्वच्छता के नाम पर घरों और सड़क से कचरा तो रोज उठ रहा था लेकिन जमीन के अंदर बिछी गटर और पीने की पानी की लाईन के प्रोजक्ट कई साल से धूल खा रहे थे.
केस नंबर 1: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से कई 15 की मौत और हजारों लोगों के बीमार होने के बाद पानी की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला ख़ुलासा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक पानी में वो बैक्टीरिया मिले हैं, जो गटर के मल मूत्र में पाये जाते हैं. पानी की जांच कराई गई थी और लैब रिपोर्ट से ये खुलासा हुआ है. मेडिकल कॉलेज की लैब में पानी के नमूनों की जांच हुई है. स्वास्थ्य विभाग को मिली रिपोर्ट में दूषित पानी की पुष्टि हुई है. सूत्रों के मुताबिक दूषित पानी में ये बैक्टीरिया मिले हैं जो मल मूत्र में पाये जाते हैं-
केस नंबर 2: सूत्रों के मुताबिक, इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में नियमों की धज्जियां उड़ाकर सीवेज लाईन के नीचे पीने के पानी की लाईन डाल दी गई. नियम के मुताबिक सड़क के एक तरफ सीवेज की और दूसरी तरफ पीने के पानी की लाईन डाली जाती है. अगर जगह की कमी है तो पीने के पानी के लाईन हर हाल में सीवेज लाईन के ऊपर होना चाहिये ताकि लीकेज होने पर पानी दूषित ना हो.
केस नंबर 3: इंदौर शहर भर में पिछले लम्बे समय से दूषित और गंदे पानी सप्लाई बड़ी समस्या है. सिर्फ एक दिसम्बर महीने भर में ही गंदे पानी की 300 से अधिक शिकायतें नगर निगम के पास पहुंची थीं. इसमें भागीरथपुरा जोन 4 की ही 23 से अधिक शिकायतें हैं. इन शिकायतों में रहवासियों ने गंदे पानी का हवाला दिया और जिम्मेदारों को चेताया. लेकिन जिम्मेदार अफसर सिर्फ फाइलों में ही समाधान खोजते रहे. भागीरथपुरा में इसी का खामियाजा निर्दोष स्थानीय रहवासियों और उनके परिवार के सदस्यों को झेलना पड़ा. भागीरथपुरा में वर्ष 2022 से नई पाइप लाइन डालने के लिए फाइल दफ्तरों में घूम रही थी.
केस नंबर 4: नगर निगम की 25-11-2022 को आयोजित एमआईसी बैठक में 106 कृमांक का एक संकल्प पास हुआ था. इसमें भागीरथपुरा में नर्मदा पाइप लाइन बिछाने और नए कनेक्शन के लिए मालवा इंजीनियरिंग नामक एजेंसी का चयन हुआ था. इस एमआईसी बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास किया गया. एमआईसी बैठक में ये प्रस्ताव में पास होने के बाद ये फाइल अचानक गायब हो गई. जानकारी है कि परिषद कार्यालय में ही रखी रही. इसके बाद फिर जनवरी 2023 में आयुक्त कार्यालय और फरवरी 2023 में अपर आयुक्त कार्यालय से ये फाइल पर हस्ताक्षर हुए और उसके बाद वापस रफ्तार पकड़ सकी. बहरहाल दफ्तरों से फाइल बाहर निकलने और काम शुरू होने में करीब चार महीनो का वक्त लग गया.
केस नंबर 5: इलाके में गंदे पानी की समस्या होने से क्षेत्रीय रहवासी लगातार इसकी शिकायत कर रहे थे. इसके बाद जलकार्य विभाग द्वारा 12/11/24 को यहां नई पाइप लाइन डालने के लिए टेंडर प्रक्रिया के लिए एक फाइल बनाई गई. लेकिन इसके लिए नगर निगम ने 7 महीने बाद 30/07/25 को टेंडर लगाए. इसके बाद एजेंसी फाइनल भी हो गई, लेकिन नगर निगम की ओर से एजेंसी को वर्क आर्डर जारी नहीं किया गया. और यही कारण है कि पांच महीने बाद भी नई पाइप लाइन बिछाने का काम ही शुरू नहीं हो पाया है.
केस नंबर 6: जलप्रदाय शाखा जैसे अहम विभाग होने के बाद भी इन विभागों की जिन अफसरों के पास जिम्मेदारी है, उनकी कार्यप्रणाली पर अक्सर सवाल लगते रहे हैं. फिलहाल कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव इसके प्रभारी हैं. वो पिछले दस साल से भी अधिक समय से इंदौर में ही पदस्थ हैं. दावा है कि शहर भर की एक एक नर्मदा लाइन की मौखिक जानकारी उनके पास रहती है. उन्हें विभाग का एक्सपर्ट होने का दावा भी किया जाता है. लेकिन उनके कार्यकाल में पानी की समस्या से जनता को अक्सर दो चार होते ही रहना पड़ा है.
इंदौर का यह हाल तो बाकी का भगवान मालिक
अब सवाल सिर्फ इंदौर का नहीं है जो आठ साल से लगातार देश का सबसे साफ शहर होने का खिताब जीत रहा है. बड़ा सवाल ये है कि जब इंदौर जैसे शहर में गटर और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की हालत इतनी खराब है तो फिर बाकी शहरों के क्या हाल होंगे. क्या हर बार सरकार कुछ लोगों की मौत होने के बाद ही जागेगी?

