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आरबीआई के रेपो पर एलान के बीच रुपये की छलांग, देखता रहा ट्रंप का डॉलर, करेंसी मार्केट में कर गया ‘खेल’, जानिए क्या कह रहे एक्सपर्ट?

Rupee vs Dollar: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति द्वारा रेपो रेट में कोई बदलाव न करने और ग्रोथ आउटलुक को सकारात्मक बनाए रखने के फैसले का असर शुक्रवार को रुपये पर भी दिखा. हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन की शुरुआत में ही भारतीय रुपया 11 पैसे की मजबूती के साथ डॉलर के मुकाबले 90.23 के स्तर पर पहुंच गया. निवेशकों में नीति को लेकर भरोसा बना रहा, जिससे शुरुआती कारोबार में रुपये को सहारा मिला.

रुपये में क्यों तेजी?

हालांकि, विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर की हल्की मजबूती के चलते रुपये की तेजी सीमित रही. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.28 पर खुला और कारोबार के दौरान 90.23 प्रति डॉलर तक मजबूत हुआ, जो पिछले बंद भाव से 11 पैसे की बढ़त दर्शाता है. एक दिन पहले यानी गुरुवार को भी रुपया 13 पैसे चढ़कर 90.34 पर बंद हुआ था.

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 97.85 पर रहा. घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिला, जहां सेंसेक्स 225.15 अंक गिरकर 83,088.78 अंक और निफ्टी 89.25 अंक फिसलकर 25,553.55 अंक पर पहुंच गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.33 प्रतिशत चढ़कर 67.77 डॉलर प्रति बैरल पर रहा. शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) गुरुवार को बिकवाल रहे और उन्होंने 2,150.51 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

क्या कह रहे एक्सपर्ट?

व्यापार समझौते को लेकर बनी उम्मीदों के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार में अब उत्साह से ज्यादा सतर्कता दिख रही है. विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि निवेशक फिलहाल जश्न मनाने के बजाय तथ्यों और पुष्टि पर ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि अभी तक न तो कोई आधिकारिक दस्तावेज जारी किया गया है और न ही दोनों देशों की ओर से अंतिम शर्तें औपचारिक रूप से सार्वजनिक की गई हैं.

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी के मुताबिक, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की उम्मीदों के बीच रुपया सकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर सकता है. हालांकि उन्होंने आगाह किया कि घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती रुपये की तेजी को सीमित कर सकती है. चौधरी ने यह भी कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव रुपये पर ऊपरी स्तरों पर दबाव बनाए रख सकता है.

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