रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति( MPC) की तीन दिन अहम बैठक सोमवार से शुरू हो गए है। यह नए वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक समीक्षा है, जो पश्चिमी एशिया के संकट के चलते महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच हो रही है। माना जा रहा है कि Sanjay Malhotra की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय समिति रेपो रेट को 5.25% पर फिलहाल स्थिर रख सकती है। बैठक में फैसलों की घोषणा 8 अप्रैल को की जाएगी।
आखिरी बार दिसंबर2025 में घटाया गया था रेपो रेट
आरबीआई ने फरवरी,2025 से अब तक नीतिगत रेपो में कुल 1.25% की कटौती की है, जो 2019 के बाद सबसे बड़ी कमी मानी जा रही है। केन्द्रीय बैंक ने पिछली बार दिसंबर में 0.25% की कटौती की थी, जबकि फरवरी की बैठक में दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) पश्चिम एशिया में भारी तनाव, कमोडिटी कीमतों उतार-चढ़ाव और रूपये की अस्थिरता जैसे कारकों पर विचार करेगी। हालांकि खुदरा महंगाई 4% के लक्ष्य के करीब है, लेकिन कचचे तेल की बढ़ती कीमतों ने घरेलू महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
100 डॉलर के पार पहुंची कच्चे तेल की कीमतें
अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी से महंगाई करीब 0.60% तक बढ़ सकती हैं।Reserve Bank of India का लक्ष्य खुदरा मुद्राफिस्ती 4%(±2%) के दायरे में बनाए रखना है। लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें करीब 60 डॉलर प्रति बैरल बनी हुई थी, लेकिन 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बाद दाम तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
भारतीय मुद्रा में 4 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट
युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय मुद्रा में 4% से अधिक की गिरावट देखी गई है, जिससे आयातित महंगाई पर दबाव बढ़ा है। जानकारों का मानना है कि RBI आगामी मौद्रिक समीक्षा में अपना तटस्थ रुख बरकार रख सकता है। यह रुक वैश्विक अनिश्चिततओ और बदलती महंगाई की स्थिति के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की प्राथमिकता को दर्शाता है।
