बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर की आबादी कैसे बढ़ गई? क्या हेमंत सोरेन बिहारियों की तुलना बांग्लादेशी घुसपैठियों से कर रहे ?

Jharkhand News: झारखंड विधानसभा में डेमोग्राफी और बांग्लादेशी घुसपैठ पर बोलते-बोलते हेमंत सोरेन ने रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो में जनसंख्या बढ़ने को लेकर सवालिया लहजे में इशारों ही इशारों में अपनी बात कह दी.

झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को भी सदन में जमकर हंगामा हुआ. इस दौरान झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने सदन में डेमोग्राफी को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिसके बाद से सियासी गलियारे में बवाल छिड़ गया है. दरअसल डेमोग्राफी और बांग्लादेशी घुसपैठ पर बोलते-बोलते हेमंत सोरेन ने रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो में जनसंख्या बढ़ने को लेकर सवालिया लहजे में इशारों ही इशारों अपनी बात कह दी. अब ऐसे में सवाल उठाने लगा है कि क्या हेमंत सोरेन बिहारियों की तुलना बांग्लादेशी घुसपैठियों से कर रहे हैं?

दरअसल सदन में सीएम हेमंत सोरेन ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि ये बांग्लादेशी घुसपैठ की बात करते हैं तो बताइए रांची, धनबाद और जमशेदपुर में आबादी किसकी वजह से बढ़ी है. ये क्या बात करेंगे? ये घुसपैठियों, बांग्लादेशी की बात करते हैं. हवा, पानी, जमीन तीनों के रास्ते पर इनका हक है. आज हमारा एक डॉलर 85,86 रुपया है. ये हमारी स्थिति पाकिस्तान से बुरी कर देंगे. हेमंत सोरेन के बयान के बाद झारखंड के सियासी गलियारे में बवाल मचना तय माना जा रहा है.

वहीं उनके भाषण को लेकर भाजपा ने हेमंत सोरेन पर हमला शुरू कर दिया है. डेमोग्राफी को लेकर इशारों ही इशारों में दिए गए हेमंत सोरेन के बयान पर प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता अविनेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के किचन कैबिनेट में कौन-कौन लोग शामिल हैं यह सभी को पता है. सीएम हेमंत सोरेन ने जिस तरह से यह बयान दिया है, उनसे सवाल है कि उनके इर्द-गिर्द जो लोग बैठे हुए हैं वो लोग कौन हैं. ये बिहारियों पर सवाल उठा रहे हैं.

हेमंत सोरेन के इस बयान को अब कांग्रेस विधायक शिल्पी नेहा तिर्की के बयान से भी जोड़कर देखा जा रहा है. बता दें, बीते हफ्ते ही एक पत्रकार के इस सवाल पर कि भाजपा घुसपैठियों का मुद्दा उठा रही है, शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा था कि डेमोग्राफी चेंज की बात करते हैं, लेकिन इनको रांची से इसकी शुरुआत करनी चाहिए. रांची में जो डेमोग्राफी चेंज हुआ है. यहां के मूल आदिवासियों को कालीन में धूल जैसे समेट कर कालीन के नीचे दे दिया है. आदिवासियों और मूल निवासियों को स्लम में धकेल कर रख दिया है. डेमोग्राफी चेंज का की बात यहां क्यों नहीं करते हैं.

शिल्पी नेहा तिर्की झारखंड में मांडर विधान सभा क्षेत्र से कांग्रेस की एक विधायक हैं. इनकी चर्चा इसलिए भी हो रही थी कि इन्होंने झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांद दुबे के संसद में उठाये गए बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में बिहार के लोगों को घसीट लिया था. इन्होंने एक तरह से बांग्लादेशी घुसपैठियों और बिहार के लोगो को एक नजर से देखते हुए विवादित बयान दिया था. उनके बयान पर बिहार और झारखंड की राजनीति में बवाल मचा गया था. वहीं अब हेमंत सोरेन के बयान से बिहार और झारखंड राजनीति में एक बार फिर उबाल आ सकता है.

वहीं इस मामले में झारखंड के वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि यह पूरा का पूरा मामला राजनीतिक हो गया है. सीएम हेमंत सोरेन के इस बयान को सिर्फ उनका नहीं बल्कि एक तरह से झारखंड चुनाव को देखते हुए यह इंडिया गठबंधन का रिएक्शन है. झारखंड चुनाव में अब अधिक समय नहीं है. ऐसे में हेमंत सोरेन के इस बयान का असर चुनाव में भी देखने को मिल सकता है. यह एक तरह से काफी गंभीर मामला है. एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों के लिए यह बयान आगामी चुनाव में अहम होने वाला है. हेमंत सोरेन के इस बयान को लेकर बिहार में बवाल होने के सवाल पर नीरज पाठक का कहना है कि बिहार में पहले से कई ऐसे राजनीतिक मुद्दे हैं जिस पर बहस होती रहती है. ऐसे में इस बयान का बिहार में बहुत असर नहीं पड़ने वाला है.

वहीं कुछ पत्रकारिता विशेषज्ञ कहते हैं कि झारखंड के बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर जैसे शहरी इलाकों में ट्राइबल आबादी घट रही रही है. इन शहरों में पड़ोसी जिले या पड़ोसी राज्य से लोग आकर बसते हैं और रोजगार आदि करते हैं. नए शहर और राज्य बनने के बाद व्यापार के अवसरों को देखते हुए लोग इन शहरों में ही नौकरी-रोजगार करते हैं और यहीं रुक जाते हैं. वहीं झारखंड के पिछड़े जिलों की आबादी दूसरे शहर में कमाने चली जाती है और वे लोग वहीं रुक जाते हैं. ऐसे में सीएम हेमंत सोरेन के इस बयान को राजनीति से जोड़ने की जरूरत नहीं है. इसका झारखंड चुनाव पर भी कुछ विशेष असर नहीं पड़ने वाला है. सीएम ने कहीं भी बिहारियों की तुलना बांग्लादेशी घुसपैठियों से नहीं की है.

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