कराची: पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को सुरक्षा को लेकर एक बार गंभीर सवाल खड़े हो गए है। बलूचिस्तान प्रांत में शिया मुस्लिम हजारा समुदाय को निशाना बनाते हुए दो लोगों को गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना प्रांतीय राजधानी क्वेटा में हुई जिसकी पुष्टि पुलिस ने की है।
पुलिस अधिकारी ने क्या बताया?
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खैर सुमलानी के अनुसार, अज्ञात हमलावर दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर हजारागंज बाजार पहुंचे, जहां हजारा टाउन से लोग सब्जियां खरीदने आए थे। इसी दौरान हमलावरों ने हजारा समुदाय को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में हजारा अल्पसंख्यक समुदाय के दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए।
भड़का लोगों का गुस्सा
पुलिस अधिकारी खैर सुमलानी ने इस घटना को सुनियोजित हत्या करार दिया है। हालांकि, अब तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। घटना के बाद हजारा समुदाय में भारी आक्रोश देखने को मिला, और विरोध स्वरूप लोगों ने वेस्टर्न बाईपास पर जाम लगाकर यातायात बाधित कर दिया।
पहले भी हुए हैं हमले
पाकिस्तान में हजारा समुदाय लम्बे समय से हमलों का शिकार होता रहा है। इससे पहले भी क्वेटा के हजारगंज बाजार में साल 2019 में हुए बम धमाके में कम से कम 20 लोगों की जान गई थी, जबकि 48 लोग घायल हुए थे। वहीं, फरवरी 2013 में हजारा टाउन में हुए बड़े विस्फोट में 91 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 190 लोग घायल हुए थे।
हजारा समुदाय के बारे में जानें
पाकिस्तान ने सुन्नी मुसलमान बहुसंख्यक हैं, जबकि अहमदिया और हजारा जैसे समुदाय अल्पसंख्यक हैं और अक्सर विरोध का सामना करते हैं। हजारा समुदाय शिया मुसलमानों का एक समूह है, जो पाकिस्तान के साथ-साथ अफगानिस्तान में भी रहता है। अफगानिस्तान में तालिबान शासन के दौरान भी इस समुदाय पर कई बार अत्याचार किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
