निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में फांसी की सजा का सामना कर रहे 4 दोषियों में से एक ने बुधवार (18 दिसंबर) को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करते हुए दावा किया कि वह दिसंबर 2012 में अपराध के समय वो नाबालिग था। दोषी पवन कुमार गुप्ता की याचिका को गुरुवार (19 दिसंबर) को सुनवाई के लिए न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। घटना के समय नाबालिग घोषित करने का अनुरोध करते हुए पवन ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने उसकी उम्र का पता लगाने के लिए हड्डियों संबंधी जांच नहीं कराई। उसने जुवेनाइल जस्टिस कानून के तहत छूट का दावा भी किया है।

पवन की तरफ से दायर याचिका में कहा कि JJ कानून की धारा 7ए में प्रावधान है कि नाबालिग होने का दावा किसी भी अदालत में किया जा सकता है। इस मुद्दे को किसी भी समय यहां तक कि मामले के अंतिम निपटारे के बाद भी उठाया जा सकता है। पवन को मौत की सजा सुनाई गई है और वह तिहाड़ जेल में बंद है।
