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बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा आदेश- दिशा सालियान मौत मामले में होगी सीबीआई जांच,जानें पूरा मामला

दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान मौत मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इस केस की जांच CBI को सौंप दी है. हाई कोर्ट ने कहा कि सालियान की मौत मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में केस दर्ज किया जाएगा और जांच के लिए CBI अधिकारी की नियुक्ति होगी.

इससे पहले 28 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोसले की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है.
क्या है दिशा सालियान मौत मामला?

8 जून 2020 को दिशा सालियान की मुंबई के मालाड स्थित दोस्त के 14वीं मंजिल के फ्लैट से गिरने के बाद मौत हो गई थी. प्राथमिक जांच, फ्लैट में मौजूद दोस्त और दिशा के मंगेतर के बयान के बाद पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की थी. ये मामला तब तूल पकड़ा जब 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत ने बांद्रा स्थित अपने घर पर आत्महत्या कर ली. सोशल मीडिया पर इन दोनों घटनाओं को जोड़कर देखा गया और अलग-अलग थ्योरी और कहानियां घूमने लगीं. दिशा ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी कुछ समय तक काम किया था. मुंबई पुलिस ने विस्तृत जांच के बाद उनकी मौत को आत्महत्या बताया था.

दिशा की मौत के लगभग 5 साल बाद मार्च 2025 में पिता सतीश सालियान ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ रेप के बाद उसकी हत्या की गई. उन्होंने मामले की नए सिरे से जांच की मांग की. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि इस मामले में अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई? कोर्ट ने यह भी कहा था कि पुलिस चाहे तो अब भी मामला दर्ज कर आगे जांच कर सकती है.

‘पिता को क्लोजर मिलना चाहिए’: हाई कोर्ट

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा था कि इस मामले से जुड़ी राजनीति में उसकी कोई रुचि नहीं है. एक पिता ने अपनी बेटी को खोया है और कोर्ट इसी नजरिए से मामले को देख रहा है. कोर्ट ने दिशा के पिता के प्रति पूरी सहानुभूति जताते हुए कहा था कि उन्हें इस मामले में क्लोजर मिलना चाहिए.

सरकार ने पिता की याचिका को बताया था तथ्यहीन

सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि दिशा की मौत की दो बार जांच हो चुकी है और दोनों बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई. जांच में कोई संदिग्ध बात सामने नहीं आई और मौत को आत्महत्या माना गया. सरकार ने पिता की याचिका को तथ्यहीन बताते हुए खारिज करने की मांग की थी.

वहीं, आदित्य ठाकरे की ओर से पेश वकील ने आरोपों को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया था. उनका कहना था कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की ओर से इस मामले को तूल दिया जा रहा है. हालांकि, उन्होंने दिशा के पिता के प्रति पूरी सहानुभूति जताते हुए कहा था कि एक पिता को अपनी बेटी की मौत का क्लोजर मिलना चाहिए, लेकिन याचिका में की गई मांगें कानूनी और तथ्यात्मक आधार पर टिकाऊ नहीं हैं.

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