आज की व्यस्त जीवनशैली में देर रात खाना खाने और आधी रात को स्नैक्स खाने की आदत बढ़ रही है। लंबे समय तक काम करना, मोबाइल-लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल और नींद का अनियमित समय इसकी प्रमुख वजहें हैं। हालांकि, खाने की टाइमिंग का असर दिल और दिमाग की सेहत पर भी पड़ सकता है, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है। मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट और संयुक्त प्रबंध निदेशक डॉ. सोनिया लाल गुप्ता के अनुसार, स्ट्रोक से बचाव के लिए संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद जरूरी हैं। कभी-कभार देर से खाना चिंता की बात नहीं, लेकिन इसे रोज की आदत बनाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
बायोलॉजिकल क्लॉक पर असर
हमारे शरीर की एक जैविक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है। यह नींद, हार्मोन, ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। देर रात खाना खाने और सोने-जागने का समय बार-बार बदलने से इन प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। 2023 में नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित एक अध्ययन में एक लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें रात 9 बजे के बाद आखिरी भोजन करने वालों में रात 8 बजे से पहले खाने वालों की तुलना में सेरेब्रोवैस्कुलर बीमारी का खतरा 28% अधिक पाया गया। हालांकि, यह अध्ययन केवल दोनों के बीच संबंध दर्शाता है, यह साबित नहीं करता कि देर रात खाना सीधे स्ट्रोक का कारण बनता है।
आधी रात की भूख में क्या खा रहे हैं, यह भी जरूरी
देर रात भूख लगने पर लोग अक्सर चिप्स, नमकीन, मिठाइयां और तले हुए या पैकेज्ड स्नैक्स खाते हैं। इनमें नमक, चीनी, अनहेल्दी फैट और कैलोरी की मात्रा अधिक हो सकती है। नियमित रूप से इनका सेवन वजन बढ़ने, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में परेशानी पैदा कर सकता है। वहीं, देर रात खाने के कारण कुछ लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं या जरूरत से ज्यादा खाना खा लेते हैं, जिससे नींद भी प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक ऐसी आदतें मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ा सकती हैं। ये सभी समस्याएं स्ट्रोक के खतरे से जुड़ी हैं।
आधी रात की भूख में क्या खा रहे हैं, यह भी जरूरी
सेहतमंद रहने के लिए सिर्फ खानपान ही नहीं, बल्कि भोजन का समय भी नियमित रखना जरूरी है। रात में सोने से ठीक पहले भारी खाना खाने से बचें और कोशिश करें कि डिनर और सोने के बीच 2-3 घंटे का अंतर रहे। हालांकि, यह आदत स्ट्रोक का खतरा कम होने की गारंटी नहीं देती। अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करें। देर रात भूख लगने पर चिप्स, मिठाइयों और तले हुए स्नैक्स के बजाय पौष्टिक विकल्प चुनें। वहीं, नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोग भी अपने काम के समय के अनुसार संतुलित खानपान और नियमित नींद की दिनचर्या बनाए रखने की कोशिश करें।
स्ट्रोक के लक्षण पहचानना जरूरी
स्ट्रोक के खतरे को कम करने के लिए संतुलित खानपान के साथ ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराना भी जरूरी है। इसके अलावा, वजन नियंत्रित रखना, रोजाना व्यायाम करना, तंबाकू से बचना और पर्याप्त नींद लेना सेहत के लिए फायदेमंद है। चेहरे का अचानक एक तरफ झुकना, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन, बोलने या देखने में परेशानी और संतुलन बिगड़ना स्ट्रोक के प्रमुख संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर बिना देर किए आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। स्ट्रोक के मामले में समय पर इलाज मिलने से गंभीर नुकसान का खतरा कम करने और बेहतर रिकवरी की संभावना बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। अपनी डाइट में बदलाव करने, फिटनेस रूटीन शुरू करने या किसी स्वास्थ्य समस्या के उपचार से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। NVR24 यहां दी गई जानकारी और दावों की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

