बिहार में विधानसभा चुनाव हुए अभी दो महीने ही हुए हैं और सियासी हलचल तेज हो गई है. जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी के हालिया बयानों से पार्टी नेतृत्व नाराज बताया जा रहा है. मामला तब गरमाया जब केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की. जदयू ने इसे त्यागी का निजी बयान बताते हुए उससे दूरी बना ली है.
JDU का कड़ा रुख, निजी बयान बताकर बनाई दूरी
JDU ने केसी त्यागी के इस कदम पर सख्त रुख अपनाया है और साफ किया है कि यह पार्टी का आधिकारिक स्टैंड नहीं है. JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने बयान देते हुए कहा कि केसी त्यागी पार्टी के साथ हैं या नहीं, यह तक पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट नहीं है.
उन्होंने कहा कि भारत रत्न को लेकर प्रधानमंत्री को लिखा गया पत्र पूरी तरह से केसी त्यागी का निजी मामला है. पार्टी की विचारधारा और आधिकारिक लाइन से इस मांग का कोई संबंध नहीं है. इस बयान के बाद यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी त्यागी के रुख से असहज है और उनके भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.
लगातार पार्टी से हटकर बयानबाजी देने से बढ़ी नाराजगी
सूत्रों के अनुसार केसी त्यागी के पिछले कुछ बयानों को लेकर जदयू में पहले से ही नाराजगी चल रही है. पार्टी नेताओं का मानना है कि त्यागी कई अहम मुद्दों पर एनडीए और जदयू की आधिकारिक नीति से हटकर बयान देते रहे हैं. IPL से बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को बाहर किए जाने पर त्यागी ने कहा था कि खेल का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है, जबकि जदयू का रुख इससे अलग रहा.
इसके अलावा समान नागरिक संहिता, सरकारी नौकरियों में लैटरल एंट्री और इजराइल-फलस्तीन संघर्ष जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी उन्होंने एनडीए की लाइन से अलग बयानबाजी की थी. इन बयानों को पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना जा रहा है.
पार्टी से निष्कासन की चर्चा तेज
JDU के अंदरखाने चर्चा है कि केसी त्यागी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. हाल के दिनों में उनके बयानों ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ाई हैं और विपक्ष को हमला करने का मौका भी दिया है. वहीं भारत रत्न को लेकर नीतीश कुमार के नाम की पैरवी करना भी JDU को असहज कर रहा है, क्योंकि पार्टी इसे राजनीतिक तौर पर संवेदनशील मुद्दा मानती है.

