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जनकपुरी हादसा: प्रवेश वर्मा ने गठित की उच्च स्तरीय जांच समिति, शाम तक मांगी रिपोर्ट,मृतक के भाई ने पुलिस पर लगाए ये आरोप

राजधानी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गड्ढे में कमल नाम के शख्स की मौत के बाद जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है, जिसे शुक्रवार शाम तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है. उन्होंने कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

वहीं, मृतक के भाई ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने कहा कि “पुलिस समय पर जागती तो भाई जिंदा होता”. भाई ने प्रशासन और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘सरासर लापरवाही’ करार दिया है. पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो उनके भाई की जान बचाई जा सकती थी.

मृतक के भाई ने कहा- यह सरासर लापरवाही
मृतक कमल के भाई करण ने बताया कि आखिरी बार बात होने पर करण ने कहा था कि वह 10 मिनट में घर पहुंच जाएगा. रात करीब 12.30 बजे जब दोबारा कॉल किया गया तो फोन नहीं उठा. इसके बाद चिंता बढ़ी और परिवार ने उसकी तलाश शुरू की. सबसे पहले वे उसके रोहिणी स्थित ऑफिस गए, फिर जनकपुरी थाने पहुंचे.

पुलिस ने सिर्फ उसकी आखिरी लोकेशन बताई और बोला ये इसकी लोकेशन है 200 मीटर के अंदर खुद खोज लो, लेकिन मौके पर कोई ठोस मदद नहीं मिली. भाई करण का कहना है कि वे लगातार तलाश करते रहे और रात 1.30 बजे उस गड्ढे के पास भी पहुंचे, लेकिन उस समय करण वहां नहीं दिखा. इसके बावजूद किसी तरह की घेराबंदी या सर्च ऑपरेशन नहीं किया गया.

पुलिस ने कहा शिकायत 24 घंटे बाद ही दर्ज होगी- भाई
मृतक के दूसरे भाई ने बताया, “कल रात करीब 11:30 बजे हमने उनसे बात की. उसने कहा कि वे डीसी सेंटर पहुंच गए हैं और घर पहुंचने में उन्हें 15 मिनट लगेंगे… 30 मिनट बाद हमने उसे 10 बार फोन किया, लेकिन उसने जवाब नहीं दिया. हम परेशान हो गए और उन्हें ढूंढने निकल पड़े, लेकिन वे नहीं मिला.

आगे बताया, “जब हम जनकपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने गए, तो उन्होंने कहा कि शिकायत 24 घंटे बाद ही दर्ज की जा सकती है. आईएएनएस को दिए बयान में उन्होंने कहा, ‘हमने उनसे अनुरोध किया, प्लीज उनके फोन की घंटी बजते समय ही उसे ट्रैक कर लें. उन्होंने लोकेशन ढूंढकर हमें भेजी, लेकिन फिर उसे डिलीट कर दिया… जब हम दोबारा गए, तो उन्होंने कहा कि वे हमें दोबारा लोकेशन नहीं दे सकते क्योंकि यह गोपनीय जानकारी है…”

पुलिस ने खुद तलाश करने को कहा- दोस्त
कमल के दोस्तों ने भी प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं. एक दोस्त ने कहा कि पूरी रात वे इधर-उधर भटकते रहे और पुलिस ने खुद तलाश करने को कहा. परिवार को बार-बार यह झूठ बोलना पड़ा कि करण अस्पताल में है और मिलने नहीं दिया जा रहा, ताकि उसकी मां घबरा न जाए. दोस्तों का आरोप है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की नाकामी है. सड़क पर खुला गड्ढा छोड़ा गया, उस पर न कोई बैरिकेडिंग थी और न चेतावनी. पीटीआई के अनुसार दोस्तों ने कहा कि अगर रात में ही खोज कर सूचना दे दी जाती, तो कम से कम इलाज का मौका मिल सकता था.

सुबह जब परिवार ने दोबारा करण के नंबर पर कॉल किया तो फोन पुलिस ने उठाया और बताया कि शव गड्ढे से बरामद कर लिया गया है. यह खबर परिवार के लिए सबसे बड़ा झटका थी. भाई ने कहा कि कमल कोई लापरवाह या पागल व्यक्ति नहीं था जो जानबूझकर गड्ढे में गिर जाए. उन्होंने बताया कि कम से कम छह थानों में जाकर मदद मांगी गई, लेकिन कहीं से कोई सपोर्ट नहीं मिला.

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