करीब 7 साल बाद ईरान से कच्चे तेल की सप्लाई फिर से भारत पहुंची है। नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी का टैंकर ‘फेलिसिटी’ करीब 20 लाख बैरल तेल लेकर गुजरात से सिक्का तट पर रविवार देर रात पहुंचा, जिसे मार्च के मध्य में खार्ग द्वीप से भरा गया था। वही दूसरी टैंकर ‘जया’ भी लगभग इतने ही तेल के साथ ओडिशा के पारादीप तट पर पहुंचा, जिसे फरवरी के अंत में लोड किया गया था। खास बात यह है कि ये दोनों खेप अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई और उसके जवाब दे पहले ही रवाना हो चुकी थीं।
7 साल में पहली बार भारत पहुंची ईरानी कच्चे तेल की खेप
करीब 7 साल बाद भारत के तटों पर पहुंची यह ईरानी कच्चे तेल की पहली खेप है, जो हाल में अमेरिका द्वारा दी गई एक महीने की प्रतिबंध छूट के चलते संभव हो पाई। इस छूट के तहत समुद्र में पहले से मौजदा ईरानी तेल को बेचने की अनुमति दी गई, ताकि वैश्विक सप्लाई में आई कमी को दूर किया जा सके और कीमतों को संतुलित रखा जा सके। वहीं, पाकिस्तान के साथ बातचीत विफल होने के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी का ऐलान भी किया है, जिससे तेहरान के तेल निर्यात से होने वाली कमाई पर असर डाला जा सके।
मार्च में रस्ते से ही चीन पहुंच गया था पिंग सुन
भारतीय तटों पर पहुंचे इन टैंकरों के खरीदारों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, पारदीप बंदरगाह,जिसे मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन संचालित करता है, ने छूट के तहत कम से कम एक खेप खरीदने की पुष्टि की है। वहीं गुजरात के सिक्का क्षेत्र में रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के प्रमुख कच्चा तेल हैंडलिंग सुविधाएं मौजूद हैं। इसी बीच ‘पिंग शून ’नाम का एक टैंकर, जो करीब 6 लाख बैरल ईरानी तेल लेकर वाडिनार आ रहा था, भुगतान से जुड़ी दिक्कतों के चलते रास्ते में ही चीन की ओर मोड़ दिया गया।
