India EU Free Trade Deal: यूरोपीय यूनियन के साथ करीब 18 वर्षों तक चली लंबी बातचीत के बाद 27 जनवरी को भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर मुहर लगना एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. इस समझौते के बाद यूरोप भेजे जाने वाले लगभग 97 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर टैरिफ समाप्त हो जाएंगे, जिससे भारत को हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर की सीमा शुल्क बचत होने का अनुमान है. इसके साथ ही, भारतीय बाजार में यूरोपीय उत्पादों की कीमतों में भी बड़ी राहत देखने को मिलेगी.
सस्ती होगी बीयर-शराब
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीयर की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक की कटौती हो सकती है, जबकि वाइन के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक कम होने की संभावना है. सबसे बड़ा बदलाव ऑटो सेक्टर में देखने को मिल सकता है, जहां फिलहाल 110 प्रतिशत तक लगने वाला टैरिफ घटकर 10 प्रतिशत तक आ सकता है.
इसके अलावा, पास्ता और चॉकलेट जैसे यूरोपीय खाद्य उत्पादों पर अभी 50 प्रतिशत तक लगने वाला आयात शुल्क एफटीए के बाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा, जिससे ये उत्पाद भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कहीं ज्यादा किफायती हो सकते हैं.
यूएस हाई टैरिफ के बाद विकल्प की तलाश
यूरोपीय यूनियन के साथ भारत की यह फ्री ट्रेड डील ऐसे समय पर हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए हाई टैरिफ के चलते वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ी हुई है और कई देश नए बाजारों की तलाश में हैं. अमेरिका की ओर से भारत पर 50 प्रतिशत तक का ऊंचा टैरिफ लगाए जाने से भारतीय निर्यात को बड़ा झटका लगा है. इसी पृष्ठभूमि में भारत-ईयू एफटीए का ऐलान दोनों पक्षों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई गहन बातचीत के बाद किया गया.
इससे पहले इसी महीने यूरोपीय यूनियन ने लैटिन अमेरिकी देशों के साथ समझौता किया था और संकेत दिया था कि वह पारंपरिक साझेदारों से आगे बढ़कर नए व्यापारिक भागीदारों की तलाश में है. ऐसे में भारत के साथ यह डील दोनों के लिए रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है, जो बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में वैकल्पिक और स्थिर बाजारों की दिशा में एक बड़ा कदम है.

