ईरान युद्ध में कैसे खिंचा चला आया यूरोप? पहले बनाई थी दूरी, एक घटना ने बदल दी सूरत

दरअसल, साइप्रस यूरोप का हिस्सा है और यह यूरोपीय यूनियन का सदस्य देश है। यहां एक्रोतिरी में ब्रिटेन की वायु सेना रॉयल एयर फोर्स P(RAF) का बेस है। इस बेस पर ईरान निर्मित ड्रोन से हमला हुआ। इस हमले में कोई घायल तो नहीं हुआ लेकिन बेस को ‘हल्के’ स्तर पर नुकसान पहुंचा। इसे यूरोपीय धरती पर हुआ हमला माना गाया।

बीते 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद पूरी दुनिया सकते में आ गई। अचानक से हुए इस हमले ने सभी को हैरान कर दिया। सैन्य अभियानों में अमेरिका की मदद करने वाले यूरोपीय देश ने फिलहाल इस हमले से दूरी बना ली। इस युद्ध पर यूरोप से सबसे पहली प्रतिक्रिया फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दी। मैक्रों ने कहा कि ‘इस युद्ध के दुष्परिणाम होंगे और वैश्विक शांति एवं स्थिरता पर इसका असर होगा।’ उन्होंने इस युद्ध को तुरंत रोकने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘इलाके में बढ़ता तनाव सभी के लिए खतरनाक है। ईरानी रीजीम के पास अब बातचीत शुरू करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। उसे अपने न्यूक्लियर एवं बैलिस्टिक प्रोग्राम बंद करने होंगे। यह परे मध्य पर्व की सरक्षा के लिए जरूरी है।’

मैक्रों ने UNSC की तत्काल बैठक बुलाए जाने की मांग की

मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल बैठक बुलाए जाने की भी मांग की। इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला करने के लिए साइप्रस स्थित ब्रिटेन के एयरबेस के इस्तेमाल की इजाजत मांगी जिसे प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा कि स्टार्मर के इस कदम से वह निराश हुए लेकिन रविवार को साइप्रेस में ब्रिटेन के एयरबेस पर ईरान के ड्रोन हमले ने स्टार्मर की सोच बदल दी और हमले के लिए उन्होंने अपने एयरबेस के इस्तेमाल की इजाजत दे रहे हैं।

यूरोपीय यूनियन का सदस्य देश है साइप्रस

दरअसल, साइप्रस यूरोप का हिस्सा है और यह यूरोपीय यूनियन का सदस्य देश है। यहां एक्रोतिरी में ब्रिटेन की वायु सेना रॉयल एयर फोर्स (RAF) का बेस है। इस बेस पर ईरान निर्मित ड्रोन से हमला हुआ। इस हमले में कोई घायल तो नहीं हुआ लेकिन बेस को ‘हल्के’ स्तर पर नुकसान पहुंचा। इसे यूरोपीय धरती पर हुआ हमला माना गाया। इस हमले के बाद स्टार्मर ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान पर हमले के लिए वह साइप्रस स्थित RAF के बेस का ‘सीमित’ इस्तेमाल करने की इजाजत दे रहे हैं।

स्टार्मर ने अपने फैसले का किया बचाव

स्टार्मर ने ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों में शामिल नहीं होने के अपने फैसले का सोमवार को बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनकी लेबर पार्टी सरकार ‘हवाई हमलों के जरिये सत्ता परिवर्तन’ में विश्वास नहीं करती। स्टार्मर ने संसद को जानकारी देते हुए बताया कि ब्रिटेन ने पश्चिम एशिया में ‘सीमित रक्षात्मक उद्देश्य’ के लिए अमेरिकी सेना को ब्रिटिश सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति दी है। उन्होंने संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमंस’ में सांसदों को संबोधित करते हुए यह बात कही। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें इस बात से ‘बहुत निराशा’ हुई कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश सैन्य ठिकानों के उपयोग को लेकर अपना निर्णय बदलने में ‘बहुत अधिक समय’ लिया।

हमने प्रारंभिक हमलों में शामिल होने से इनकार किया था- स्टार्मर

स्टार्मर ने कहा, ‘ईरान पर अमेरिका और इजराइल के शुरूआती हमलों में ब्रिटेन शामिल नहीं था। यह निर्णय जानबूझकर लिया गया था। हम मानते हैं कि इस क्षेत्र और पूरी दुनिया के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि एक समझौता किया जाए, जिसमें ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की अपनी इच्छाओं को छोड़ने पर सहमति जताए और क्षेत्र में अस्थिरता ‘ब्रिटेन की अलग-अलग सरकारों का यह दीर्घकालिक रुख रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हमारे उस फैसले पर असहमति जताई है, जिसमें हमने प्रारंभिक हमलों में शामिल होने से इनकार किया था, लेकिन यह मेरा कर्तव्य है कि मैं यह तय करूं कि क्या चीज ब्रिटेन के राष्ट्रीय हित में है। यही मैंने किया है, और मैं इस निर्णय पर कायम हूं।’

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