सिंगर और रैपर हनी सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। महाराष्ट्र साइबर सेल ने दिल्ली में आयोजित एक कॉन्सर्ट के दौरान कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में उन्हें पूछताछ के लिए समन जारी किया है। जांच एजेंसी ने हनी सिंह को 16 अक्टूबर को अधिकारियों के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। हालांकि, रैपर ने पेशी के लिए 22 अक्टूबर तक का समय मांगा, लेकिन साइबर सेल ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया और आज ही उपस्थित होने के आदेश दिए।
गौरतलब है कि इस मामले में हनी सिंह को पहले भी तीन बार समन भेजा जा चुका है। हालांकि, विदेश में होने का हवाला देकर वह पेशी टालते रहे। इसके बाद 14 अक्टूबर को साइबर सेल ने उन्हें चौथा समन जारी किया और 16 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाया। अब जांच अधिकारियों ने अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में इस मामले में हनी सिंह की पेशी को लेकर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
क्या है मालमा?
दरअसल, यह पूरा मामला दिल्ली में हनी सिंह के एक लाइव परफॉर्मेंस से जुड़ा है। इस कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें रैपर कथित तौर पर आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणी करते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद शिकायतकर्ता ने महाराष्ट्र साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर एजेंसी ने हनी सिंह को पूछताछ के लिए समन जारी किया।
पहले भी जारी किया जा चुका है समन
अधिकारियों के मुताबिक, हनी सिंह को अब तक तीन बार समन भेजा जा चुका है, लेकिन विदेश में होने का हवाला देकर वह पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए। 5 अक्टूबर को भी उन्हें मुंबई स्थित महाराष्ट्र साइबर सेल कार्यालय बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने समय मांगा। इसके बाद 14 अक्टूबर को चौथा समन जारी कर 16 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश दिया गया। अब एजेंसी ने अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, अगर हनी सिंह आज पेश नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
हनी सिंह और विवाद
हनी सिंह इससे पहले भी अपने बयानों और गानों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। मई 2025 में दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में परफॉर्मेंस के दौरान उनका एक गाना विवादों में आ गया था। इससे पहले 2 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को सोशल मीडिया और शेयरिंग प्लेटफॉर्म से उनके विवादित गाने ‘वॉल्यूम 1’ के लिंक हटाने के निर्देश दिए थे। यह कार्रवाई हिंदू शक्ति दल नामक संगठन की याचिका पर की गई थी।

