भारत दौरे पर आए जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भारतीय यात्रियों के लिए एक अहम घोषणा की है. उन्होंने कहा कि अब भारतीय नागरिकों को जर्मनी के एयरपोर्ट्स से होकर किसी तीसरे देश की यात्रा करने के लिए ट्रांजिट वीजा लेने की जरूरत नहीं होगी. इस फैसले से उन हजारों भारतीय यात्रियों को सीधी राहत मिलेगी, जिन्हें यूरोप या अमेरिका जाते समय जर्मनी के एयरपोर्ट्स पर लेओवर के लिए अतिरिक्त वीजा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था. इस फैसले की औपचारिक घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रेडरिक मर्ज के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान की गई.
इस कदम को भारत और जर्मनी के बीच लोगों से लोगों के संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, इससे दोनों देशों के बीच यात्रा, शिक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा.
ट्रांजिट वीजा क्या होता है और क्यों जरूरी था?
ट्रांजिट वीजा एक अल्पकालिक अनुमति होती है, जिसकी जरूरत तब पड़ती है, जब कोई यात्री अपनी अंतिम मंज़िल तक पहुंचने से पहले किसी अन्य देश के एयरपोर्ट पर रुकता है. इस रुकावट को लेओवर कहा जाता है. अब तक भारतीय नागरिकों को जर्मनी या अन्य शेंगेन देशों के एयरपोर्ट्स से गुजरते समय शेंगेन एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा लेना अनिवार्य था, भले ही वे एयरपोर्ट से बाहर न निकलें. इसके लिए यात्रियों को आगे की यात्रा के टिकट समेत अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करने होते थे. जिससे पूरी प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली बन जाती थी. इस घोषणा के बाद अब भारतीय नागरिक जर्मनी के एयरपोर्ट्स के जरिए बिना ट्रांजिट वीजा यात्रा कर सकेंगे.वीजा आवेदन की लंबी प्रक्रिया से राहत मिलेगी.यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों की यात्रा आसान और किफायती होगी.
छूट केवल ट्रांजिट यात्रा तक सीमित
यह स्पष्ट किया गया है कि जर्मनी में प्रवेश करने के लिए अब भी टूरिस्ट, बिजनेस, स्टूडेंट या वर्क वीजा जरूरी होगा. यह छूट केवल ट्रांजिट यात्रा तक सीमित है. कुल मिलाकर, यह फैसला समय, पैसे और कागजी औपचारिकताओं तीनों की बचत करेगा.
भारत-जर्मनी के बीच 19 अहम समझौते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की मुलाकात के बाद भारत और जर्मनी के बीच लगभग 19 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. इनमें प्रमुख रूप से रक्षा औद्योगिक सहयोग शामिल हैं. दोनों देशों के बीचउच्च शिक्षा और रिसर्च सहयोग को बढ़ाने की योजना, दूरसंचार क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है. इसके अलावा, दोनों नेताओं ने भारत–यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
एशिया की पहली यात्रा पर जर्मन चांसलर
जर्मन चांसलर बनने के बाद फ्रेडरिक मर्ज की यह पहली एशिया यात्रा है. वह सोमवार (12 जनवरी 2026) की सुबह एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ अहमदाबाद पहुंचे. उनकी दो दिवसीय यात्रा का फोकस आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देना है.

