रहे ना रहे हम महका करेंगे… मजरूह सुल्तानपुरी
मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया मजरूह सुल्तानपुरी, हिंदी सिनेमा के एक ऐसा गीतकार जिसने अपनी कमल से कई शानदार गीत लिखे, होठों में ऐसी बात मैं दबा के चली आई… मेरी भीगी भीगी सी पलकों पर रह गये… चला जाता हूं किसी की धुन में… […]
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