भारतीय वैज्ञानिकों ने नई तकनीक से बनाया मास्क, करेगा वायरस को नष्ट

देश मेंं कोविड-19 की वजह से बढ़ते संक्रमित मामलो को देखते हुए भारतीय वैज्ञानिक अपने अपने स्तर पर अलग-अलग शोध और आविस्कार करना शुरू कर दिया है। जिससे इस चुनौती से निपटने में मदद मिल सके। इसी कड़ी में गुजरात के भावनगर के केंद्रीय नमक और समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिको ने एक खास तरह के फेस-मास्क बनाए हैं, जिसके संपर्क में आने पर कोरोना वायरस नष्ट हो सकते हैं। केंद्रीय नमक और समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिको की माने तो इस मास्क की बाहरी परत को पारदर्शी पॉलीसल्फोन मैटेरियल से बनाया गया है, जिसकी मोटाई 150 माइक्रोमीटर है। इसकी खासियत ये है कि यह मैटेरियल 60 नैनोमीटर या उससे अधिक किसी भी वायरस को खत्म कर सकता है। आपको बता दें कोरोना वायरस का व्यास 80-120 नैनोमीटर के बीच है। बता देें इस मास्क को अभी मेडिकली एप्रूवल अभी नहीं मिला है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे अप्रूवल मिलते ही कोविड-19 के प्रकोप से जूझ रहे आम लोगों के साथ-साथ कोरोना का इलाज कर रहे डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों को खतरे से बचाया जा सकता है।

इस मास्क को बनाने वाले वैज्ञानिको का दावा है कि इसे धोकर दोबारा उपयोग किया जा सकता है। और साथ ही दूसरे महंगे मास्कों की तुलना में यह काफी सस्ता है। इस मास्क को बनाने में 25 से 45 रुपये तक लागत आती है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद से संबद्ध सीएसएमसीआरआई के मेम्ब्रेन साइंस ऐंड सेप्रेशन टेक्नोलॉजी विभाग की माने तो देश में इस तरह के मास्क बनाने का आइडिया अपने आप में काफी नया है। इसकी बाहरी परत वायरस, फंगल और बैक्टीरिया प्रतिरोधी है। इसे बनाने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि इन सब खूबियों को देखते हुए ये एक तरह से एन-95 मास्क से भी बेहतर साबित हो सकता है।

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