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चीन देखता रह गया और अमेरिका ले उड़ा ‘खजाना’!

दक्षिण अमेरिका का देश वेनेजुएला, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार की छाती पर बैठा है, इन दिनों भू-राजनीतिक खेल का मैदान बना हुआ है. आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि कुआं वेनेजुएला का था, लेकिन प्यास चीन की बुझ रही थी. वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल कच्चा तेल है, जिसकी अनुमानित कीमत 15 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है. इतनी भारी-भरकम संपत्ति होने के बावजूद, यह देश चीन के भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ था. लेकिन अब कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट आ गया है. अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात की कमान अपने हाथ में ले ली है, जिससे चीन का बना-बनाया खेल बिगड़ गया है. जो तेल पहले कर्ज चुकाने के लिए चीन जा रहा था, अब उसका रास्ता बदल गया है.

15 ट्रिलियन डॉलर का खजाना
यह मामला सिर्फ तेल का नहीं, बल्कि कूटनीति और कर्ज के उस मकड़जाल का भी है जिसे चीन ने बड़ी चालाकी से बुना था. 1990 के दशक के अंत से ही चीन और वेनेजुएला के रिश्ते मजबूत होने लगे थे. हालात ये थे कि 2023 में इन रिश्तों को ‘ऑल वेदर स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप’ का नाम दे दिया गया. ऊर्जा, फाइनेंस और मिलिट्री सहयोग के नाम पर चीन ने वेनेजुएला को अपने करीब किया. अमेरिका-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद दोनों देशों का याराना गहरा था. असल में, चीन ने वेनेजुएला को भारी कर्ज दिया और बदले में वहां के तेल संसाधनों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली. यह एक तरह का सौदा था पैसा लो और तेल दो.

आखिर कितना पैसा फंसा है?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने वेनेजुएला को बुरी तरह जकड़ रखा था. अमेरिका की विलियम एंड मैरी यूनिवर्सिटी की रिसर्च लैब ‘AidData’ के मुताबिक, साल 2000 से 2018 के बीच चीनी सरकारी बैंकों ने वेनेजुएला को करीब 106 अरब डॉलर का कर्ज दिया था. साल 2017 तक आते-आते वेनेजुएला पर 44 अरब डॉलर का बकाया था.

हालांकि, 2017 में जब वेनेजुएला डिफॉल्ट कर गया (कर्ज चुकाने में असमर्थ हुआ), तब से सटीक आंकड़े मिलना मुश्किल हो गया है. जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि अभी भी 13 से 15 अरब डॉलर का हिसाब बाकी है, जबकि कुछ संस्थाएं इसे 10 अरब डॉलर मानती हैं. पेंच यह है कि वेनेजुएला ने 2019 के बाद से अपने आर्थिक आंकड़े जारी करना ही बंद कर दिया है.

अमेरिका की एंट्री से बिगड़ा ड्रैगन का खेल
चीन और वेनेजुएला के बीच ‘तेल के बदले कर्ज’ का यह खेल बहुत ही शातिराना तरीके से चल रहा था. पीडीवीएसए (वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी) के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि 2019 में चीन ने कर्ज के मूलधन (Principal Amount) की अदायगी में कुछ छूट दी थी. इसके बदले में वेनेजुएला से रोजाना करीब 6 लाख 42 हजार बैरल कच्चा तेल और ईंधन चीन भेजा जा रहा था.

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