Chaitra Navratri 2026

Chaitra Navratri 2026: पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा से भरेगी झोली,जानिए प्रिय भोग और मंत्र

Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवता हैं. उन्हीं में से एक मां दुर्गा की पूजा-आराधना का विशेष महत्व है. चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू होने वाला है और सनातन धर्म में इन 9 दिनों का विशेष महत्व माना जाता है. इस दौरान भक्त माता दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. मान्यता है कि नवरात्रि के इन दिनों में मां दुर्गा पृथ्वी पर विराजमान होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. इस साल चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से हो रहा है. नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन सही विधि से पूजा और उचित भोग अर्पित करने से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है.


स्कंदमाता को नवदुर्गा का पांचवां स्वरूप माना जाता है. देवी की चार भुजाएं हैं. दाईं ओर की ऊपरी भुजा में वह भगवान स्कंद को अपनी गोद में बैठाए हैं जबकि नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है. बाईं ओर की ऊपरी भुजा वरद मुद्रा में होती है, जो भक्तों को आशीर्वाद देती है और नीचे वाली भुजा में भी कमल का फूल सुशोभित रहता है. स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है. मान्यता है कि जो श्रद्धा और भक्ति से उनकी पूजा करता है, उसपर माता जल्द प्रसन्न होती हैं और उसे सुख-समृद्धि के साथ मोक्ष का आशीर्वाद भी प्रदान करती हैं.


स्कंदमाता का प्रिय भोग
नवरात्रि के पावन 9 दिनों में हर दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और उन्हें विशेष भोग अर्पित किया जाता है. नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की आराधना का विशेष महत्व माना गया है. इस दिन माता को केले का भोग लगाना शुभ माना जाता है. पूजा के बाद इस प्रसाद को श्रद्धापूर्वक ग्रहण करने से संतान से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं और स्वास्थ्य संबंधी बाधाएं भी कम होती हैं. शास्त्रों में स्कंदमाता की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है. मान्यता है कि सच्चे मन से उनकी उपासना करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. स्कंदमाता को सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी भी माना जाता है, इसलिए उनकी भक्ति करने वाले साधक के जीवन में तेज, ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है. जो भक्त एकाग्रचित्त और पवित्र मन से मां की आराधना करते हैं, उनके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और वे आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है.
स्कंदमाता के मंत्र

  1. सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया।
    शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।
  2. या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बिहार के इन 2 हजार लोगों का धर्म क्या है? विश्व का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड कौन सा है? दंतेवाड़ा एक बार फिर नक्सली हमले से दहल उठा SATISH KAUSHIK PASSES AWAY: हंसाते हंसाते रुला गए सतीश, हृदयगति रुकने से हुआ निधन India beat new Zealand 3-0. भारत ने किया कीवियों का सूपड़ा साफ, बने नम्बर 1