Karoline Leavitt

कैरोलिन लेविट की ईरान को धमकी,डोनाल्ड ट्रंप करेंगे बड़ा हमला,अमेरिका ने इरादे कर दिए साफ

अमेरिका की तरफ से ईरान को एक बार फिर बड़ी चेतावनी मिली है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने साफ कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब कोई खेल नहीं खेल रहे. अगर ईरान मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए समझौता नहीं करता, तो अमेरिका उस पर भयंकर हमला कर सकता है. लेविट ने जोर देकर कहा कि ट्रंप सिर्फ धमकियां नहीं देते, बल्कि वो असल में तबाही मचाने के लिए तैयार हैं.

ईरान पर किसी भी समय बड़ा हमले में सक्षम हैं ट्रंप: लेविट

लेविट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान को सीधा संदेश दिया. उन्होंने कहा, ‘अगर ईरान अभी भी सच्चाई नहीं मानता कि उसे सैन्य कार्रवाई से हरा दिया गया है और आगे भी हराया जाएगा, तो राष्ट्रपति ट्रंप ये पक्का कर देंगे कि ईरान पर अब तक का सबसे जोरदार हमला किया जाए.’ उन्होंने आगे कहा, ‘ट्रंप सिर्फ धमकियां नहीं देते, वे तबाही मचाने को तैयार हैं. ईरान को फिर से कोई गलत अंदाजा नहीं लगाना चाहिए.’

कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान पर जमीनी हमला करेंगे: लेविट

अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान की नौसेना को पूरी तरह तबाह कर दिया है. लेविट ने इसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद तीन हफ्तों में किसी देश की नौसेना को सबसे तेजी से खत्म करने का सबसे बड़ा उदाहरण बताया. उन्होंने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को जबरदस्त फौजी जीत बताया है.

जमीनी कार्रवाई पर भी साफ बात कही गई. लेविट ने बताया कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिकी सैनिक ईरान में उतर सकते हैं, लेकिन इसके लिए कांग्रेस से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि देश पहले से ही ईरान के खिलाफ बड़े फौजी अभियान चला रहा है.

ईरान के साथ बातचीत जारी है: लेविट

ईरान के साथ बातचीत पर लेविट ने ज्यादा कुछ नहीं बताया. उन्होंने कहा कि ये बहुत संवेदनशील मामला है और हालात लगातार बदल रहे हैं. अमेरिका ने ईरान को 15 सूत्री प्रस्ताव दिया था. लेविट ने माना कि उसमें ‘कुछ सच्चाई’ जरूर है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स ‘पूरी तरह सही नहीं’ हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा, ‘मैं यहां प्रेस से राष्ट्रपति की तरफ से कोई बातचीत नहीं कर रही हूं. बस इतना बता सकती हूं कि बातचीत अभी भी जारी है.’

ये चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. व्हाइट हाउस का कहना है कि ईरान को अब गलतफहमी नहीं रखनी चाहिए. ट्रंप प्रशासन शांति चाहता है, लेकिन अगर ईरान नहीं माना तो वो कोई कसर नहीं छोड़ेगा.

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