भवानीपुर सीट अब ममता के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन चुकी है।सुवेंदु ने 2021 के चुनाव में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को 1,956 मतों के मामूली अंतर से हराया था। इस हार के बाद बनर्जी भवानीपुर से उपचुनाव के माध्यम से विधानसभा पहुंचीं। ये सीट उनका गढ़ मानी जाती है। पांच साल बाद एक बार फिर दोनों नेता चुनावी मुकाबले में आमने सामने होंगे।

Bhabanipur Seat: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का सियासी पारा गर्म हो चुका है। तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों आक्रामक अंदाज में हैं। दोनों पार्टी की चुनावी तैयारी पूरी है। तृणमलू कांग्रेस ने मंगलवार को एक ही बार में विधानसभा की सभी 294 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। हालांकि, तीन सीट उसने अपने सहयोगी दल के लिए छोड़ी है। भाजपा ने 16 मार्च को 144 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित किए। प्रदेश में सबसे बड़ा मुकाबला भवानीपुर सीट पर देखने को मिलेगा। इस सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुकाबला भाजपा के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी से होगा। यह हाई प्रोफाइल सीट बन गई है।
ममता बनर्जी को एक बरा हरा चुके हैं सुवेंदु
रिपोर्टों में भाजपा सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भवानीपुर सीट से अधिकारी को उतारने के पीछे पार्टी की एक रणनीति है। 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से सुवेंदु, ममता बनर्जी को हरा चुके हैं। भवानीपुर से अधिकारी को उतार भाजपा ममता बनर्जी पर दबाव बनाना चाहती है। दूसरा, वह ममता को उनकी सीट पर ज्यादा से ज्यादा समय देने का भी दबाव बना रही है ताकि उन्हें अन्य सीटों पर प्रचार करने के लिए कम समय मिले। नंदीग्राम से चुनाव हारने के बाद ममता ने भवानीपुर सीट से उपचुनाव लड़ा और फिर इस सीट से वह जीतीं।
प्रतिष्ठा का विषय है यह सीट
भवानीपुर सीट अब ममता के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन चुकी है। सुवेंदु ने 2021 के चुनाव में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को 1,956 मतों के मामूली अंतर से हराया था। इस हार के बाद बनर्जी भवानीपुर से उपचुनाव के माध्यम से विधानसभा पहुंचीं। ये सीट उनका गढ़ मानी जाती है। पांच साल बाद एक बार फिर दोनों नेता चुनावी मुकाबले में आमने सामने होंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनौती के बारे में पूछे जाने पर बनर्जी ने कहा, ‘इस बार हम भवानीपुर में अधिकतम मतों से जीत हासिल करेंगे।’
नंदीग्राम से भी उम्मीदवार हैं सुवेंदु
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा द्वारा शुभेंदु अधिकारी को उनकी पारंपरिक सीट नंदीग्राम के अलावा भवानीपुर से मैदान में उतारने का निर्णय, इस निर्वाचन क्षेत्र को चुनाव का प्रतीकात्मक युद्धक्षेत्र बनाने का एक सुनियोजित प्रयास है, जिसका मकसद नंदीग्राम जैसा चुनाव परिणाम मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में दोहराया जा सके। वर्ष 2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से भवानीपुर पार्टी के सबसे सुरक्षित शहरी गढ़ों में से एक रहा है। इस निर्वाचन क्षेत्र में बनर्जी का आवास है और इस सीट से वह विधानसभा के लिए चुनी जाती रही हैं।
भवानीपुर में मतदाता सूची से 47,000 से अधिक नाम हटाए गए
वर्ष 2021 में ममता के नंदीग्राम सीट से हार के बाद, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने बनर्जी के उपचुनाव लड़ने के लिए यह सीट खाली कर दी थी। बनर्जी ने 58,000 से अधिक मतों के भारी अंतर और लगभग 72 प्रतिशत मतों के साथ जीत दर्ज की थी। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने चुनाव में एक नया राजनीतिक आयाम जोड़ दिया है। एसआईआर प्रक्रिया में भवानीपुर में मतदाता सूची से 47,000 से अधिक नाम हटाए गए हैं। नामों को हटाने की यह संख्या राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि यह उस 58,000 से अधिक वोटों के अंतर से लगभग 11,000 कम है, जिससे बनर्जी ने 2021 के उपचुनाव में जीत हासिल की थी।

