बारिश और बाढ़ ने देश के कई सूबों में हाहाकार मचा रखा है। पहाड़ से लेकर मैदान तक आसमान से आफत बरस रही है। सबसे बुरा हाल असम का है जहां 84 से ज्यादा लोगों की अबतक बारिश की वजह से मौत हो गई है। आज देश का बड़ा हिस्सा आसमानी आफत से त्राहिमाम कर रहा है। क्या घर, क्या दुकानें सब जलमग्न हो गए हैं। नदियां अपनी सीमाएं तोड़ कर शहरों में घुस आई हैं।
नेपाल (NEPAL) में हो रही भारी बारिश के कारण वहां से बिहार आने वाली नदियां उफान पर हैं। ऐसी स्थिति में नेपाल से गंडक व कोसी नदियों के रास्ते पानी आने पर हालात बिगड़ते दिख रहे हैं। जल संसाधन विभाग ने उत्तर बिहार के छह जिलों तथा कोसी तटीय इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है। इस बीच कोसी नदी के भारी दबाव को देखते हुए बराज के 56 में से 48 फाटक खोल दिए गए हैं। CM नीतीश कुमार ने भी आपदा प्रबंधन विभाग एवं सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अगले तीन दिनों तक पूरे बिहार में बारिश की आशंका को देखते हुए बाढ़ की आशंका और गहराती दिख रही है।
नेपाल में हो रही भारी बारिश बिहार के लिए काल बन गई है। तमाम शहर और गांव बाढ़ के पानी डूब गए हैं। मौसम विभाग ने पूर्वी और पश्चमी चंपारण, गोपालगंज, वैशाली, सीतामढ़ी और दरभंगा के लिए अलर्ट जारी किया है। बागमती नदी और गंडक नदी में पानी का स्तर और खतरनाक ढंग से बढ़ सकता है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को ऊंचाई वाली जगहों पर जाने को कहा गया है।
विदित हो कि नेपाल में गंडक के जलग्रहण क्षेत्र में हो रही भारी बारिश से नदी के डिस्चार्ज में भारी बढ़ोतरी की आशंका है। इस वजह से पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली एवं सारण जिलों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर मंगलवार की सुबह 4.16 लाख क्यूसेक पानी छाड़ा गया, जिससे जलस्तर स्तर में वृद्धि के बाद बगहा के दर्जनों गांवों में पानी घुस गया है।
उधर मौसम विभाग ने उत्तराखंड में 23 से 25 जुलाई तक रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। जबकि देहरादून और पौड़ी गढ़वाल के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इससे पहले शिमला में सोमवार को भारी बारिश के बाद पहाड़ टूट गया और बाजार को तबाह कर गया। लैंडस्लाइड से शिमला की सेब मंडी में भारी नुकसान हुआ।

