BANGLADESH

Bangladesh Election 2026 Voting: तारिक रहमान बनेंगे बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री? जानें कौन-कौन सी चुनौतियां

Bangladesh Election 2026 Voting: बांग्लादेश में आज 12 फरवरी को आम चुनाव के लिए मतदान हो रहे हैं. यह भले ही आम चुनाव हों, लेकिन बांग्लादेश के सियासी इतिहास का सबसे ख़ास चुनाव होने जा रहा है. अवामी लीग की ग़ैर मौजूदगी में बीएनपी बांग्लादेश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी के तौर पर देखी जा रही है. बीएनपी यानि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी जो बांग्लादेश की पुरानी पार्टियों में से एक है.

ख़ालिदा जिया पहली बार 1991 में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं. दूसरी बार साल 2001 में बीएनपी की ख़ालिदा जिया ने बांग्लादेश में सरकार बनाई. हालांकि इस सरकार में जमात ए इस्लामी भी शामिल हुई थी, लेकिन साल 2006 के बाद से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी कभी भी सत्ता में वापस नहीं आ पाई.

हसीना के तख्तापलट से बांग्लादेश में सब बदला
2009, 2014, 2018 और 2024 के आम चुनावों में शेख हसीना की अवामी लीग की बंपर जीत हुई. साल 2014 के चुनावों में बीएनपी ने धांधली के आरोप लगाए तो वहीं 2024 के आम चुनाव का बीएनपी ने बहिष्कार कर दिया, लेकिन अब 5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में सब कुछ बदल चुका है. अब अवामी लीग पर चुनावी प्रतिबंध लग चुका है और बड़ी पार्टी के तौर पर बीएनपी ज़रूर दिखाई दे रही है. साल 2026 के आम चुनाव में सिर्फ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात ए इस्लामी के बीच ही मुक़ाबला दिखाई दे रहा है.

लंबे समय बाद लंदन से ढाका लौटे तारिक रहमान
शेख़ हसीना के तख्तापलट से पहले ख़ालिदा जिया जेल में थीं और उनके बेटे तारिक रहमान लंदन में निर्वासित जीवन जी रहे थे, लेकिन शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद ख़ालिदा जिया को जेल से रिहा किया गया और उनके बेटे तारिक रहमान भी लंबे समय के बाद लंदन से ढाका लौटे. तारिक रहमान ऐसे समय में बांग्लादेश पहुंचे, जब उनकी मां ख़ालिदा जिया बेहद बीमार थीं और अस्पताल में भर्ती थीं. तारिक रहमान ने ढाका पहुंचते ही पार्टी की कमान संभाली और आम चुनाव की तैयारियों में जुट गए. चुनाव की घोषणा के कुछ दिनों बाद ही ख़ालिदा जिया का निधन हो गया.

तारिक रहमान के सामने चुनौती यह है कि इतने लंबे समय से बांग्लादेश से दूर रहने के बाद वो पार्टी को कितना समझ पाएंगे और जनता की नब्ज़ कितनी पकड़ पाएंगे. यह ज़रूर है कि विकल्पहीनता का फ़ायदा तारिक रहमान को मिलेगा. यह भी कहा जा सकता है कि मां ख़ालिदा जिया के निधन का सहानुभूति फ़ैक्टर भी तारिक रहमान के साथ होगा, लेकिन 17-18 साल तक अपने देश से दूर रहना एक लंबा समय होता है. इस दौरान पूरी एक पीढ़ी बदल जाती है तो क्या तारिक रहमान सच में बांग्लादेश की जनता की आवाज़ सुन पाएंगे? वहीं क्या बांग्लादेश की जनता तारिक रहमान पर भरोसा कर पाएगी?

बीएनपी के चुनावी वायदे
तारिक रहमान ने अपने चुनाव प्रचार में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. तारिक रहमान ने इस चुनाव में नारा दिया है- Bangladesh Before All. वो बांग्लादेश की 2 सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं और चुनावी घोषणापत्र भी जारी कर चुके हैं. बीएनपी 300 सीटों में से 292 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. 8 सीटें सहयोगी दलों के खाते में दी है. तारिक बीएनपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार भी हैं. चुनाव के दौरान ही दुनिया भर के डेलीगेशन और डिप्लोमैट ने तारिक रहमान से मुलाकात की. कुछ बड़े चुनावी वादे जो तारिक रहमान की तरफ से किए गए हैं-

  1. जुलाई नेशनल चार्टर को लागू करेंगे. (यह छात्र आंदोलन की सबसे बड़ी मांग थी)
  2. मुक्ति आंदोलन के सही इतिहास को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाएंगे.
  3. बांग्लादेश में उप राष्ट्रपति का पद बनाएंगे.
  4. कोई भी व्यक्ति अधिकतम 10 साल के लिए प्रधानमंत्री पद पर रह पाएगा.
  5. संसद में 100 सदस्यीय उच्च सदन की स्थापना.
  6. जुलाई, 2024 में हुई हत्याओं और हिंसा की जांच के लिए स्वतंत्र जांच आयोग का गठन.
  7. पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और समानता की दोस्ती के लिए प्रतिबद्ध.
  8. मुस्लिम देशों के साथ सहयोग को मज़बूत करेंगे.

तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमात ए इस्लामी गठबंधन है, क्योंकि जमात ए इस्लामी के साथ युवाओं की नयी नवेली पार्टी NCP का भी गठबंधन है. ऐसे में तारिक रहमान के सामने चुनौती दोहरी है. एक तरफ जहां युवा वर्ग एनसीपी के साथ जा सकता है तो वहीं दूसरी तरफ जो इस्लामी शासन के कट्टर समर्थक हैं, वो जमात ए इस्लामी के साथ जा सकते हैं.

भारत के साथ संबंधों पर नजर
भारत के साथ संबंधों को लेकर भी तारिक रहमान पर सभी की नज़रें हैं. बांग्लादेश की आम जनता पूरी तरह से यह चाहती है कि बांग्लादेश में जो भी सरकार बने, वो भारत से संबंध बहुत मधुर और अच्छे करके रखे. बांग्लादेश की जनता भारत को बहुत आदर और सम्मान के साथ देखती है. बांग्लादेश की जनता भारत के साथ संबंधों को हमेशा किसी भी अन्य देश से बहुत आगे रखती है. हाल ही में जब तारिक रहमान की मां ख़ालिदा जिया का निधन हुआ था, तब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शोक संवेदना व्यक्त की. भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने ढाका का दौरा किया था और ख़ालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे.

अब देखना यह होगा कि साल 2006 के बाद ख़ालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान बीएनपी को बांग्लादेश की सत्ता तक पहुंचा पाएंगे? यह चुनाव और चुनावी नतीजे दोनों ही तारिक रहमान और बीएनपी के सियासी भविष्य के लिए बड़े महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं. ना सिर्फ बीएनपी के भविष्य के लिए बल्कि तारिक रहमान की हार-जीत में अवामी लीग का भविष्य भी छिपा हुआ है.

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