यूपी विधानसभा में सीएम योगी के ‘हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता’ वाले बयान पर अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया है. उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार किया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बड़े ही तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि एक राजनीतिक व्यक्ति की औकात कब से हो गई शंकराचार्य पर सवाल उठाने की.
बातचीत में उन्होंने कहा कि शंकराचार्य कौन होगा, इसका निर्णय 4 पीठों के शंकराचार्य करते हैं. जिस पीठ का प्रश्न होता है, उसके अलावा के 3 शंकराचार्य निर्णय करते रहे हैं. शंकराचार्य का एक संविधान है ‘मठाम्नाय महानुशासन’, जिसे आदि शंकराचार्य जी ने ही लिखा है. उसके अनुसार, एक आचार्य के जाने के बाद दूसरे आते हैं और उसमें उनके लक्षणों की व्याख्या की गई है.
एक मुख्यमंत्री तय करेगा कि कौन शंकराचार्य होगा- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
जब हमारे गुरु जी ब्रह्मलीन हुए तो उन्होंने मेरा नाम पहले ही घोषित कर रखा था. वे हमारी योग्यता से परिचित थे. उन्होंने ऐलान कर दिया था कि हम ही ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य होंगे. तो जब शंकराचार्यों ने निर्णय कर लिया, तो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद हाई कोर्ट और लोअर कोर्ट की औकात है क्या कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर प्रश्नचिह्न उठाएं. इसी तरह क्या किसी महंत, संत या तथाकथित व्यक्ति की औकात है कि वह शंकराचार्यों के फैसले पर सवाल उठाए. और वह भी एक राजनीतिक व्यक्ति, एक प्रदेश का मुख्यमंत्री. क्या अब एक मुख्यमंत्री तय करेगा कि कौन शंकराचार्य होगा. क्या सनातन धर्म में उनका इतना बड़ा हस्तक्षेप हो चुका है. यह बहुत बड़ा सवाल है, जिसका जवाब उन्हें सदन में ही दोबारा देना पड़ेगा कि आप यह दुस्साहस किस आधार पर कर रहे हैं.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अखिलेश यादव पर दी प्रतिक्रिया
सपा चीफ अखिलेश यादव द्वारा समर्थन किए जाने पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अखिलेश यादव ने क्या कहा, इससे हमें क्या फर्क पड़ता है. जिस समय जिसे जो भी अपनी राजनीति के हिसाब से ठीक लग रहा होगा, वह बोल रहा होगा. वह वहां तक ठीक है. लेकिन इस समय तो योगी आदित्यनाथ, जिनकी पुलिस ने चोटी उखाड़-उखाड़ कर बटुकों को मारा है, जिनकी पुलिस ने सनातन धर्म का अपमान किया है और सनातन के स्वाभिमान को तोड़ने का दुस्साहस किया है, हमारा सवाल उनसे है. इसलिए वह जो कह रहे हैं, उस पर विचार किया जाएगा. बाकी लोगों की बात अभी नहीं है.
उन्होंने कहा कि राज्यपाल को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि वे एक संवैधानिक पद पर हैं. सीएम लोगों को पीट रहे हैं तो कहां हैं राज्यपाल? कहां हैं राष्ट्रपति. उन्हें सवाल पूछना चाहिए. सीएम का कहना है कि भगदड़ को बचाने के लिए उन्होंने ऐसा कदम उठाया है, तो यह सब उनके ही समय में क्यों हो रहा है. देखिए, इतनी हिम्मत कि सदन में खड़े होकर कह रहे हैं कि यह तो कल्पवासियों का मेला था, इसे कोई जानता नहीं था.
यूपी की सरकार में ब्राह्मण असुरक्षित- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
उन्होंने कहा कि यूपी में ब्राह्मणों का अपमान हो रहा है. वे नाराज हैं. यह पिछले कार्यकाल से ही शुरू हो चुका है. सुरक्षा एक अहम मुद्दा रहा है. और हम किससे मदद मांगने जाएं. जिस राज्य का सीएम ही हमें मारना चाहता है. अगर वे ऐसा नहीं चाहते तो ऐसा क्यों करते. मार नहीं पाए, वह अलग बात है. उत्तर प्रदेश सरकार से हमें खतरा है. उन्होंने कहा कि अब यह जनता तय करेगी कि किसे राज्य का नेतृत्व सौंपा जाए.

