Atal Tunnel Rohtang Inauguration

टनल निर्माण की लागत तीन गुणा बढ़ी, सेना की जरूरतों को नहीं समझा गया- पीएम मोदी

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लाहुल के बाशिंदों को आज असल आजादी मिल गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Atal Tunnel देश को समर्पित की। यह सुरंग लाहुल के लोगों सहित सेना को भी बल देगी। सेना की लेह लद्दाख में सीमा तक पहुंच आसान होगी।

प्रधानमंत्री साउथ पोर्टल से नार्थ पोर्टल के लिए खुली जिप्‍सी में रवाना हुए। नरेंद्र मोदी ने आपातकालीन टनल का जायजा लिया। पीएम मोदी ने लाहुल स्‍पीति जिला में टनल के दूसरे छोर नार्थ पोर्टल पर पहुंच कर बस को हरी झंडी दी। इस बस में लाहुल के बुजुर्गों ने सफर किया। प्रशासन ने 15 बुजुर्गों का चयन किया था, जिसमें से 14 लोग बस में सवार थे।


PM MODI ने BRO को सुझाव दिया 1500 ऐसे लोग चिह्नित करें, जाे अपना अनुभव लिखें। इसमें मजदूरों व इंजीनियरों को शामिल करें। शिक्षा मंत्रालय से आग्रह किया कि तकनीकी शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों से केस स्टडी करवाएं। दुनिया को हमारी इस ताकत का ज्ञान होना चाहिए।

PM MODI ने कहा वायुसेना आधुनिक लड़ाकू विमान मांगती रही, लेकिन फाइल पर फाइल खोली गई। आयुध डिपो पर ध्यान नहीं दिया गया। तेजस को डिब्बे में बंद करने के प्रयास किए गए। सीडीएस से बेहतर समन्वय बना है। मोदी ने कहा सेना के लिए देश में हथियार बनेंगे। भारतीय संस्थानों को बढ़ावा दिया गया है व कई विदेशी कंपनियों को वैन किया गया।

देरी से लागत तीन गुणा बढ़ी
PM MODI ने कहा देरी से लागत तीन गुना बढ़ गई। सीमा क्षेत्र पर कनेक्टिविटी तेजी से होनी चाहिए, लेकिन सेना की जरूरतों को नहीं समझा गया। लदाख में दोलत बेग ओल्डी एयर स्ट्रिप 40 साल बंद रखी, ऐसी क्या मजबूरी थी। असम में पुल का काम अटल के समय शुरू हुआ था। कोसी महासेतु के काम पर ध्यान नहीं दिया गया। हमारी सरकार में पुल पर तेजी से काम किया।

प्रीणी गांव में करते थे अटल से आग्रह, बाद में बन गया उनका ही सपना
पीएम मोदी बोले, मेरा बहुत बड़ा सौभाग्‍य है जो अटल टनल के लोकार्पण का अवसर मिला। बतौर भाजपा प्रभारी हिमाचल से गहरा नाता रहा है। अटल जी जब प्रीणी स्थित आवास पर आते थे तो वह तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के साथ उनसे मिलते थे। अटल जी से सुरंग निर्माण को आग्रह करते थे और बाद में यही प्रोजेक्‍ट उनका सपना बन गया। आज यह सपना पूरा हो गया। अभेद्य पीरपंजाल को भेदकर, आज कठिन स्थिति से पार पाया गया है। जान जोखिम में डालने वाले, जवानों, इंजीनीयरों मजदूरों को नमन करता हूं।


अटल सरकार जाते ही भुला दिय, 2014 में लाए तेजी

लाहुल के उत्‍पाद दिल्ली तक पहुंचेंगे। टनल से देश को नई ताकत मिलेगी। देश की सुरक्षा व समृद्धि का बड़ा जरिया है। लंबे समय से मांग होती रही, मगर प्लानिंग का हिस्सा नहीं बना। अटल सरकार जाते ही टनल को भूला दिया गया। 2013 तक मात्र डेढ़ किलोमीटर काम हुआ था। ऐसे काम चलता रहता तो 2040 तक काम पूरा होता, 2014 से तेजी लाई गई। 300 मीटर की जगह टनल बनाने की रफ्तार 1300 मीटर प्रति वर्ष हुई।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा मोदी ने हमेशा Atal Tunnel की चिंता की। अनुमानित लागत पर काम पूरा किया, बीआरओ बधाई का पात्र है। सामरिक दृष्टि से टनल महत्वपूर्ण है। अब रसद तेजी से सीमा पर पहुंचेगी। राजनाथ सिंह ने कहा जब टनल बननी थी तो मोदी हिमाचल के प्रभारी थे और आज प्रधानमंत्री के रूप में शुभारंभ कर रहे हैं, ये संजोग बहुत सुखद है।

PM MODI दोपहर 12 से 12:45 तक सिस्सू में जनसभा करेंगे, जबकि 12:50 पर वापस टनल होकर सोलंगनाला पहुंचेंगे और भाजपा नेताओं को संबोधित करेंगे।

रोहतांग में स्थित 9.02 किलोमीटर लंबी ये टनल मनाली को लाहौल स्फीति से जोड़ती है। इस टनल की वजह से मनाली और लाहौल स्फीति घाटी सालों भर एक-दूसरे से जुड़े रह सकेंगे। इससे पहले बर्फबारी की वजह से लाहौल स्फीति घाटी साल के 6 महीनों तक देश के बाकी हिस्सों से कट जाती थी।


बता दें कि ‘Atal Tunnel’ का निर्माण अत्याधुनिक तकनीक की मदद से पीर पंजाल की पहाड़ियों में किया गया है। ये समुद्र तट से 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। ‘Atal Tunnel ‘ के बन जाने की वजह से मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो गई है और दोनों स्थानों के बीच सफर में लगने वाले समय में 4 से 5 घंटे की कमी आएगी।

‘Atal Tunnel’ का आकार घोड़े की नाल जैसा है। इसका दक्षिणी किनारा मनाली से 25 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र तल से 3060 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जबकि उत्तरी किनारा लाहौल घाटी में तेलिंग और सिस्सू गांव के नजदीक समुद्र तल से 3071 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

10.5 मीटर चौड़ी इस सुरंग पर 3.6 x 2.25 मीटर का फायरप्रूफ आपातकालीन निकास द्वार बना हुआ है। ‘Atal Tunnel ‘ से रोजाना 3000 कारें, और 1500 ट्रक 80 किलोमीटर की स्पीड से निकल सकेंगे।

‘Atal Tunnel’ में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। हर 150 मीटर की दूरी पर टेलीफोन की व्यवस्था की गई है ताकि आपात स्थिति में संपर्क स्थापित किया जा सके। हर 60 मीटर की दूरी पर अग्निशमन यंत्र रखे गए हैं। 250 की दूरी पर सीसीटीवी की व्यवस्था है।

वायु की गुणवत्ता जांचने के लिए हर 1 किलोमीटर पर मशीन लगी हुई हैं। गौरतलब है कि रोहतांग दर्रे के नीचे इसको बनाने का फैसला 3 जून 2000 को लिया गया था। इसकी आधारशिला 26 मई 2002 को रखी गई थी।

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