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अमेरिका की मंशा सामने आई,मिडिल ईस्ट के 7 मुस्लिम देशों को तोड़कर बनेगा ग्रेटर इजराइल

अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी के बयान ने संकेत दिया कि अमेरिका के कुछ नेता ग्रेटर इजराइल के विचार के प्रति सहानुभूति रखते हैं. उन्होंने इजराइल के संभावित क्षेत्रीय विस्तार को धार्मिक आधार पर सही ठहराने की बात कही. इजराइली नेताओं के बयानों और अमेरिकी समर्थन से अंतरराष्ट्रीय कानून और फिलिस्तीनी राज्य की संभावना पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

इजराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने कुछ दिन पहले बयान दिया था कि इजराइल का मिडिल ईस्ट के बड़े हिस्से पर अधिकार है. हकाबी ने कंजरवेटिव कमेंटेटर टकर कार्लसन से बातचीत में कहा कि अगर इजराइल मिस्र की नील नदी से लेकर इराक की यूफ्रेट्स नदी तक का इलाका अपने कब्जे में ले ले, तो उन्हें इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी. हकाबी के बयान की अरब और मुस्लिम देशों ने निंदा भी की है. उनके बयान को सिर्फ निजी राय नहीं माना गया. आइए समझते हैं कि हकाबी ने ये बयान क्यों दिया, इसके पीछे अमेरिका और इजराइल की कौन सी सोच है. हालांकि अमेरिका ने कहा कि माइक के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है.

दरअसल, हकाबी ने इजराइल के संभावित विस्तार को धार्मिक आधार से जोड़ा. उन्होंने इसे ईश्वर की इच्छा जैसा बताया और यह भी कहा कि अगर युद्ध के जरिए जमीन पर कब्जा होता है तो उसे वैध माना जा सकता है. आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान से लगता है कि कुछ अमेरिकी अधिकारी अंतरराष्ट्रीय कानून, क्षेत्रीय शांति और फिलिस्तीनी अधिकारों से ज्यादा इजराइल के साथ वैचारिक संबंधों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

ग्रेटर इजराइल प्लान पर काम कर रहे नेतन्याहू

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी कई बार कह चुके हैं कि इजराइल का ऐतिहासिक और धार्मिक अधिकार उसकी मौजूदा सीमाओं से बाहर की जमीन पर भी है. उन्होंने वेस्ट बैंक में बस्तियों को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मिशन का हिस्सा बताया. 2025 में दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वे ग्रेटर इजराइल के विचार से गहराई से जुड़े हैं और इसमें अपनी भूमिका को ऐतिहासिक और दिव्य जिम्मेदारी मानते हैं. अरब देशों ने इन बयानों की कड़ी आलोचना की और इसे खतरनाक और भड़काऊ बताया.

इजराइल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने 2023 में ऐसे नक्शे दिखाए जिनमें फिलिस्तीनी इलाके, लेबनान, सीरिया और जॉर्डन को इजराइल का हिस्सा बताया गया. उन्होंने यह भी कहा कि फिलिस्तीनी लोग ऐतिहासिक रूप से गढ़ी गई पहचान हैं. 2025 में उन्होंने वेस्ट बैंक में बस्तियां बढ़ाने की योजना की घोषणा की, जिसका उद्देश्य फिलिस्तीनी राज्य के आइडिया को ही खत्म करना बताया गया. वेस्ट बैंक पर इजराइल का कब्जा, गोलान हाइट्स का विलय और 2024 के बाद साउथ लेबनान में सैन्य चौकियां इन सबको इसी बड़े लक्ष्य से जोड़ा जा रहा है.

अमेरिकी राजदूत ने इंटरनेशनल कोर्ट पर आरोप लगाए

हकाबी ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट और इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) जैसी अंतरराष्ट्रीय अदालतों को बागी संगठन कहा, क्योंकि वे इजराइल के कब्जे का विरोध करती हैं. 2024 में आईसीजे ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर इजराइल के कब्जे को अवैध बताया, लेकिन इस फैसले को लागू नहीं किया गया.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब इजराइल के नेता खुलकर विस्तार की बात करते हैं और अमेरिकी अधिकारी उसे सामान्य बताते हैं, तो इससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ सकता है. इससे फिलिस्तीनी राज्य बनने की संभावना कमजोर होती है, अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर पड़ता है और पूरे क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है.

ग्रेटर इजराइल प्रोजेक्ट क्या है?

हर्जल का ग्रेटर इजराइल मिस्र से लेकर फरात नदी तक फैला हुआ है. दावा किया जाता है कि यह मिडिल ईस्ट में सिर्फ यहूदी प्रोजेक्ट नहीं है बल्कि अमेरिका की विदेश नीति का अभिन्न अंग है. इसका मुख्य उद्देश्य मध्य-पूर्व में रणनीतिक तौर पर अमेरिका के वर्चस्व को बढ़ाना है. जिस तरह आजाद फिलिस्तीन के लिए रिवर टू सी का नारा दिया जाता है, उसी तरह ग्रेटर इजराइल के लिए रिवर टू रिवर का नारा दिया जाता है. इसके तहत मिस्र की नील नदी से लेकर पश्चिम एशिया की फरात नदी तक ग्रेटर इजराइल की कल्पना की गई है.

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