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हांकगांक की बिल्डिंग में आग लगने से 55 लोगों की गई जान,क्या है पूरा मामला समझें

हांगकांग के ताई पो जिले में बुधवार को लगी भीषण आग के बाद अब बांस फोकस में आ गया है. शहर की निर्माण परंपराओं, खासकर बांस की स्कैफोल्डिंग यानी मचान, पर नई बहस छिड़ गई है. शुरुआत में इस बांस में ही आग लगी और देखते ही देखते कई टावर लपटों और धुएं में घिर गए. हादसे में खबर लिखे जाने तक 55 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है. जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि आग इतनी तेजी से कैसे फैल गई. हांगकांग की पहचान माने जाने वाली बांस स्कैफोल्डिंग यहां हजारों साल पुरानी परंपरा है. यह तकनीक हान राजवंश (2000 साल पहले) तक चली जाती है और आज भी शहर की गगनचुंबी इमारतों के निर्माण और मरम्मत में आमतौर पर दिखाई देती है.
लचीली, सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण इसे लंबे समय तक आधुनिक निर्माण में भी अपनाया गया. लेकिन इस हादसे के बाद इस तकनीक पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बांस स्वभाव से ज्वलनशील होता है और इस समय हांगकांग में मौसम काफी सूखा है. ऐसे में किसी भी चिंगारी से आग बहुत तेजी से फैल सकती है. हांगकांग पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जिनयान हुआंग ने बताया कि चूंकि बांस की पोलें खड़ी दिशा में लगी होती हैं, इसलिए आग बिना किसी रुकावट के ऊपर की ओर भागती चली जाती है. यह भी माना जा रहा है कि इमारतों पर लगे कुछ प्लास्टिक नेट, कैनवास और सुरक्षा कवर अग्नि मानकों पर खरे नहीं उतरे.

बांस को लेकर क्या था विवाद?
जांच में पुलिस को निर्माण कंपनी के नाम वाले ज्वलनशील पॉलीस्टाइन शीट्स भी मिलीं, जिनसे कुछ खिड़कियां ढकी हुई थीं. अधिकारियों ने कहा कि ऐसे बोर्डों की मौजूदगी ‘असामान्य’ है और यह जांच का प्रमुख हिस्सा होगी कि क्या इन्हीं सामग्रियों ने आग को और भड़काया. बांस स्कैफोल्डिंग को लेकर बहस इस साल पहले से चल रही थी. हांगकांग के डेवलपमेंट ब्यूरो ने हाल ही में घोषणा की थी कि मार्च 2025 के बाद बनने वाली 50% नई सार्वजनिक परियोजनाओं में मेटल स्कैफोल्डिंग अनिवार्य होगी. इसका कारण मजदूरों की सुरक्षा बताया गया था, लेकिन अब आग के बाद यह मुद्दा और गर्म हो गया है.
बांस को हटाना क्यों नहीं आसान?
लेबर डिपार्टमेंट के आंकड़ों के अनुसार 2018 से 2025 के बीच बांस स्कैफोल्डिंग से जुड़े 24 हादसे मौत का कारण बने. वहीं अक्टूबर में एक और इमारत, जो बांस स्कैफोल्डिंग से ढकी थी, हांगकांग के बिजनेस जिले में आग की चपेट में आ गई थी. हालांकि बांस का इस्तेमाल पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है. कई स्थानीय लोग इसे सांस्कृतिक विरासत मानते हैं और इसे हटाने के फैसलों का विरोध भी हो रहा है. बांस न सिर्फ इमारतों के निर्माण में बल्कि पारंपरिक कैंटोनीज ओपेरा थिएटरों में भी इस्तेमाल होता है.
मचान बनाने के क्या है नियम?
कानून के अनुसार हांगकांग में हर स्कैफोल्डिंग प्रोजेक्ट को सरकारी नियमों का पालन करना अनिवार्य है, जिनमें बांस की मोटाई, प्लास्टिक स्ट्रिप की ताकत और आग रोधक नेट का इस्तेमाल जैसी शर्तें शामिल हैं. इसके बावजूद ताई पो में आग कैसे सात इमारतों तक पहुंच गई यह सवाल अब जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा मुद्दा है. हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव जॉन ली ने कहा है कि एक टास्क फोर्स पता लगाएगी कि क्या इमारतों की बाहरी दीवारें और सुरक्षा सामग्री आग रोधक मानकों पर खरी उतरती थीं. उन्होंने वादा किया कि अगर किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.

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