अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर यूपी में सियासत तेज हो गई हैं. समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस मामले की जाँच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी टीम के गठन पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि ये मामला राज्य का नहीं पूरे राष्ट्र से जुड़ा हुआ हैं. करोडों लोगों की आस्था इससे जुड़ी हुई हैं. इसलिए इसकी जाँच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जाँच समिति से होनी चाहिए.
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि “यह प्रदेश स्तर से जुड़ा मामला नहीं हैं, पूरे राष्ट्र से जुड़ा हुआ है. क्योंकि इसमें इस देश के करोड़ों लोगों का विश्वास जुड़ा हुआ बेहद गंभीर मामला है. इसे देखते हुए ही मैंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि इसकी जांच सर्वोच्च अदालत की निगरानी में होना चाहिए. वहीं उन्होंने जाँच से पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी भंग करने की मांग की.
एसआईटी की जाँच पर जताया संदेह
अवधेश प्रसाद ने कहा कि यूपी सरकार द्वारा एसआईटी की तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है, इसकी स्वतंत्र या निष्पक्ष जाँच होगी, इस पर संदेह लगता है. इसलिए ये प्रदेश स्तर का मामला नहीं है. पूरे राष्ट्र का मामला है. प्रभु श्री राम का मामला है. इसलिए इसकी जाँच माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित टीम को करनी चाहिए और जाँच होने से पहले जो मौजूदा ट्रस्टी हैं ट्रस्ट में रहने वाले लोग हैं इस ट्रस्ट को ही भंग करना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की माँग
सपा सांसद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी वाली जांच में ही जो-जो ज़िम्मेदार हैं वो नहीं बच पाएंगे और पूरे देश के सामने सच्चाई आ जाएगी. उन्होंने कहा कि आज का सबसे बड़ा मुद्दा है प्रभु श्री राम के मंदिर में चढ़ावे को लेकर हैं. जिसे हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुलासा किया है.
‘जांच से पहले भंग किया जाए ट्रस्ट’
चंदा चोरी को लेकर सपा सांसद ने कहा कि ये बात भी सामने आ रही है कि चढ़ावे का पैसा लोग गोबर में छिपा रहे हैं. मैं माँग करता हूं कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक टीम गठित की जाए और उस टीम की ओर से जाँच किया जाए. इससे पहले ट्रस्ट के जितने भी लोग है उन सभी को हटा दिया जाए, जिससे इस मामले की जाँच प्रभावित न हो सके.
बता दें कि यूपी सरकार ने राम मंदिर चढ़ावे में चोरी मामले पर तीन सदस्यीय एसआईटी की टीम का गठन किया है. इस टीम में यूपी पुलिस के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया हया है. ये टीम पहले सात दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों में फाइनल रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं.

