NEET पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच मध्य प्रदेश में भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने 4 स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया है। चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के अंदर जल्द से जल्द फैसला सुनाने के निर्देश दिए गए है। यह व्यवस्था लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत लागू की गई है। दरअसल, 2020 से जून 2026 के बीच मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड ने 73 परीक्षाएं आयोजित की थीं, जिसके पेपर लीक होने के बाद हलचल मच गई।
परीक्षा घोटाले पर MP हाई कोर्ट का बड़ा कदम
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक, छद्म रूप धारण (इम्पर्सोनेशन), अनुचित साधनों के उपयोग और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रदेश में चार विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय नामित किए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की पहल पर भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीशों को विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय के रूप में नामित किया गया है। बता दें कि पेपर लीक पर सख्ती के लिए मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम में संशोधन करने को लेकर मोहन यादव सरकार सुर्खियों में रही।
हाई कोर्ट ने बनाए 4 विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट
भोपाल: प्रवीण पटेल 18वे जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश
ग्वालियर: विशाल अखंड 8वे जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश
जबलपुर: आनंद कुमार सेहलाम 27 वे जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश
इंदौर: डॉ. शुभ्रा सिंह 26 वे जिला एवं सत्र न्यायाधीश
3 माह के भीतर ट्रायल पूरा करने के निर्देश
ये विशेष न्यायालय लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत दर्ज संबंधित अपराधों तथा राज्य या केंद्र सरकार द्वारा संदर्भित जांच एजेंसियों की विवेचना वाले मामलों की सुनवाई करेंगे। हाई कोर्ट ने संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिए हैं कि चार्जशीट दाखिल होने की तिथि से तीन माह के भीतर विचारण (ट्रायल) पूरा कर निर्णय सुनाने का हरसंभव प्रयास किया जाए। हाई कोर्ट का मानना है कि इस त्वरित व्यवस्था से परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों में शीघ्र अभियोजन और न्याय सुनिश्चित होगा। इसके साथ ही संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगेगा तथा सार्वजनिक परीक्षाओं व भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के प्रति जनविश्वास मजबूत होगा।(अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के साथ भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत दर्ज संबंधित अपराधों व राज्य या केंद्र सरकार द्वारा संदर्भित जांच एजेंसियों की विवेचना वाले मामलों की सुनवाई करेंगे।

