कोलकाता में दुर्गा पूजा की सप्तमी की शाम चोरबागान सार्वजनिन पंडाल में जो कुछ हुआ, उसने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए. आइए जानें कैसे हादसा हुआ.
शाम 7:40 बजे ! सप्तमी की शाम को बारिश होने लगी. हालांकि मौसम विभाग ने पहले ही बारिश की संभावना जताई थी, लेकिन शहर के बड़े पूजा स्थलों पर लोगों की भीड़ उमड़ रही थी. कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिन में भी पिछले कुछ दिनों से बहुत भीड़ हो रही थी. बारिश शुरू हुई तो लोग बचने के लिए पूजा पंडाल में घुस गए. इसके बाद मची भगदड़ में 19 लोगों की जान चली गयी और 35 लोग घायल हो गये.
चोरबागान सार्वजनिन के आयोजक प्रीतम सरकार ने कहा, “बारिश शुरू हुई तो पानी से बचने के लिए लोग पंडाल में घुसने लगे. एक बार में लोगों को अंदर जाने देने से दबाव में पंडाल का एक हिस्सा गिर गया. बारिश की वजह से कम रोशनी की वजह से विजिबिलिटी कम थी.”
रोशनी और अंधेरे वाले इलाकों में आने-जाने के लिए एक ही रास्ता था. रास्ता बहुत ही संकरा था. इस कारण भगदड़ मच गई और लोग भागने लगे और इस दौरान लोग कुचल गये.
अपनी आंखों के सामने मां को कुचलते देखा
25 साल का सोनू पाल घटना के समय अपनी मां के साथ पंडाल में था. उसने अपनी आंखों के सामने मां को कुचलते देखा. उसके चेहरे पर अभी भी डर है. उसने कहा, शायद मैं भी नहीं बचता.
सोनू कुमारटुली की रहने वाला है. वह सप्तमी की शाम को अपनी मां के साथ चोरबागान पंडाल देखने गया था. सोनू के मुताबिक, बाहर बारिश हो रही थी. कोई भी पंडाल से बाहर नहीं आना चाहता था. इस बीच, बारिश से बचने के लिए दरवाजे पर खड़े लोग अंदर जाने के लिए धक्का-मुक्की करते रहे.
उसके मुताबिक, दबाव न झेल पाने के कारण, पंडाल के अंदर मौजूद सभी लोग गिर पड़े और मुंह के बल गिर पड़े. सोनू ने कहा, “मैं खुद भी बहुत परेशान था. मैंने किसी तरह खुद को संभाला और अपनी मां के पास गया, लेकिन मैंने देखा कि मेरी मां वहां नहीं थीं.”
वॉलंटियर कहां थे, भीड़ क्यों नहीं संभली?
चश्मदीदों ने आरोप लगाया कि मंडप में एंट्री और एग्जिट और भीड़ कंट्रोल को लेकर अनाउंसमेंट ठीक से नहीं किए गए थे. इस वजह से मांग दुर्गार के दर्शन करने आए लोगों में कन्फ्यूजन फैल गया. नतीजतन, एक हादसा हुआ. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पंडाल में काफी पुलिस नहीं थी. सिर्फ VIP गेट पर पुलिस थी. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि घायलों को अस्पताल ले जाने में कोई एडमिनिस्ट्रेटिव मदद नहीं दी गई.
सवाल यह उठता है कि पंडाल में लोगों की भीड़ को संभालने के लिए कई वॉलंटियर ड्यूटी पर थे, लेकिन बारिश के दौरान वे कहां थे? पुलिस भीड़ को क्यों नहीं संभाल पाई? पूजा संगठन और पुलिस की भूमिका पर लोकल लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया है.
चोरबागान पंडाल में भगदड़ के बाद हड़कंप
हादसे में घायल सभी लोगों को जल्दी से रेस्क्यू करके कोलकाता मेडिकल कॉलेज (MCH) भेजा गया. हालात को संभालने के लिए लालबाजार कंट्रोल रूम से और पुलिस फोर्स, फायर ब्रिगेड, कोलकाता पुलिस डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप (DMG) और मेडिकल टीम के साथ एम्बुलेंस भेजी गई.
एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, मैंने सुना कि पंडाल का एक हिस्सा गिर गया था. सब लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे. वे गिर रहे थे, और उन्हें कुचला गया और उनकी मौत हो गई.
स्थानीय लोगों ने यहां क्राउड कंट्रोल मैनेजमेंट पर भी सवाल उठाए हैं. एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, यहां हजारों वॉलंटियर और पुलिस थी, लेकिन पहले कोई कदम नहीं उठाया गया. इतनी बड़ी घटना हो रही है. हम इसे अपनी आंखों के सामने देख रहे हैं. कोलकाता पुलिस की गाड़ी वहां खड़ी थी, पुलिस ने कुछ नहीं किया. हम लोकल लोगों ने किया. पूजा कमिटी का कोई भी नहीं दिखा.

