Shaksgam Valley

Shaksgam Valley पर चीन के दावों को भारत ने बताया अवैध, कहा- अपने हितों की रक्षा के लिए उठाएंगे कदम

Army Chief on Shaksgam Valley: शक्सगाम घाटी को लेकर भारत ने चीन और पाकिस्तान को एक बार फिर साफ संदेश दिया है. सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दोहराया कि 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच हुआ सीमा समझौता भारत के लिए पूरी तरह गैर-कानूनी और अमान्य है. उन्होंने कहा कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है और वहां किसी भी तरह की गतिविधि को भारत मान्यता नहीं देता. इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय भी पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है.

1963 का समझौता भारत को मंजूर नहीं
सेना प्रमुख ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान ने 1963 के समझौते के तहत शक्सगाम घाटी का हिस्सा चीन को सौंपा था, जिसे भारत कभी स्वीकार नहीं करता. उन्होंने साफ कहा, ‘हम वहां किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं करते हैं. यह समझौता हमारे लिए गैर-कानूनी है.’ जनरल द्विवेदी ने कहा कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) भी भारत के लिए मान्य नहीं है. उन्होंने इसे दोनों देशों द्वारा किया जा रहा गैर-कानूनी काम बताया और कहा कि यह परियोजना भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरती है.

महिलाओं की एंट्री पर सेना का रुख
सेना प्रमुख ने कहा कि भविष्य में महिलाएं इन्फैंट्री और पैरा-एसएफ में भी आ सकती हैं, लेकिन इसके लिए समाज को तैयार रहना होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना जेंडर इक्वालिटी नहीं, बल्कि जेंडर न्यूट्रैलिटी की बात करती है. अगर महिलाएं सेना के तय मानकों और मेडिकल फिटनेस पर खरी उतरती हैं, तो उनके लिए दरवाजे खुले हैं. जनरल द्विवेदी ने कहा कि सेना को उम्मीद है कि आने वाले समय में रक्षा बजट में बढ़ोतरी होगी, जिससे क्षमताओं को और मजबूत किया जा सकेगा.

13 भैरव बटालियन से बढ़ी ताकत
उन्होंने बताया कि भारतीय सेना में अब तक 13 भैरव लाइट कमांडो बटालियन खड़ी की जा चुकी हैं. ये यूनिट्स इन्फैंट्री के घातक प्लाटून और पैरा-एसएफ के बीच की खाई को भरेंगी और आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करेंगी.

ड्रोन युद्ध की नई हकीकत
सेना प्रमुख ने कहा कि आज ड्रोन की संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल है. 500 किलोमीटर के बॉर्डर पर हजारों ड्रोन हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने 100 किलोमीटर तक मार करने वाले ड्रोन का परीक्षण भी कर लिया है और हर कमांड में ड्रोन बनाने की क्षमता विकसित की जा रही है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीति
जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन की भूमिका और मजबूत हुई है. इसके तहत इन्फैंट्री बटालियनों में ‘अशनि प्लाटून’ बनाए गए हैं, जिनमें खास तौर पर प्रशिक्षित ड्रोन ऑपरेटर तैनात हैं.

भैरव बटालियन और दिव्यास्त्र बैटरी
उन्होंने बताया कि भैरव बटालियनों को UAS और काउंटर-UAS सिस्टम, भारी गोला-बारूद और आधुनिक संसाधनों से लैस किया गया है. इसके अलावा तोपखाने में ‘दिव्यास्त्र बैटरी’ बनाई गई है, जो डिवीजन कमांडर को सीधा समर्थन देगी.

बांग्लादेश पर भारत की सतर्क नजर
जनरल द्विवेदी ने कहा कि बांग्लादेश में फिलहाल अंतरिम सरकार है, ऐसे में भारत को तुरंत प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं का बांग्लादेश की सेना के साथ लगातार संपर्क बना हुआ है और कोई भी गतिविधि भारत के खिलाफ नहीं है.

जम्मू में आतंकी मौजूदगी, तैनाती मजबूत
सेना प्रमुख ने बताया कि पीर पंजाल के दक्षिण, जम्मू क्षेत्र में करीब 40 आतंकियों की मौजूदगी है, जिनमें से अधिकतर पाकिस्तानी हैं. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सैन्य तैनाती में कोई कमी नहीं की जाएगी.

सीजफायर उल्लंघन और ऑपरेशन सिंदूर
उन्होंने बताया कि 2025 में अब तक 139 बार सीजफायर उल्लंघन हुआ, जिनमें से 124 बार ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ. ऑपरेशन सिंदूर में 9 में से 7 लक्ष्य नष्ट किए गए और यह अभियान अभी जारी है.

उत्तर और पूर्वोत्तर सीमा पर स्थिति
सेना प्रमुख ने कहा कि उत्तरी सीमा पर स्थिति स्थिर है, लेकिन सतर्कता जरूरी है. एलएसी पर भारतीय तैनाती संतुलित और मजबूत बनी हुई है. पूर्वोत्तर में मणिपुर की स्थिति में 2025 के दौरान सुधार हुआ है और म्यांमार चुनाव के बाद सहयोग और बेहतर होगा.

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