प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने पिछले साल नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. पार्टी की तरफ से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि सत्ताधारी गठबंधन ने गलत तरीके अपना कर चुनाव को प्रभावित किया. पार्टी ने राज्य में दोबारा चुनाव की मांग की है.
जन सुराज की याचिका में खास तौर पर महिला मतदाताओं को 10 हजार रुपए की राशि दिए जाने मसला उठाया गया है. याचिका में कहा गया है कि डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के नाम पर 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को यह राशि तब भेजी गई जब राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू थी.
याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ना और उन्हें आदर्श आचार संहिता के दौरान भुगतान करना गलत था. यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के अलावा जनप्रतिनिधत्व कानून के प्रावधानों का भी उल्लंघन है इसलिए, कोर्ट इसे अवैध करार दे.
याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (भ्रष्ट आचरण) के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दे. याचिकाकर्ता ने मतदान के दौरान राज्य के स्वयं सहायता समूह ‘जीविका’ से जुड़ी 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को मतदान केंद्रों पर तैनात किए जाने को भी चुनौती दी है.
याचिका में कहा गया है कि चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियों का एक समान स्तर पर रहना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी है इसलिए, कोर्ट चुनाव आयोग को निर्देश दे कि वह फ्रीबिज की घोषणा और लोगों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं को लेकर नियम बनाए. चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच शुक्रवार, 6 फरवरी को मामले की सुनवाई करेगी.

