वेतनभोगी लोगों के राजनीतिक संगठन से खेला दांव, क्या इस वजह से एक भी सीट नहीं जीत पाए प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर ने पहले दावा किया था कि उनकी पार्टी 150 सीट जीतेगी, लेकिन बाद में कहा कि सीटों की संख्या में या तो पार्टी टॉप पर होगी या सबसे निचले पायदान पर। पार्टी जोरदार प्रचार अभियान और बेरोजगारी, पलायन और उद्योगों की कमी जैसे ज्वलंत मुद्दों को उठाने के बावजूद वोट जुटाने में विफल रही

बिहार चुनाव में पूर्व चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की ‘एक्स फैक्टर’ कही जाने वाली जन सुराज पार्टी (जेएसपी) अपना खाता भी नहीं खोल पाई। पार्टी ने 238 सीटों पर चुनाव लड़ा था। बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार, जेएसपी के अधिकतर उम्मीदवारों को कुल डाले गए वोटों के 10 प्रतिशत से भी कम वोट मिले हैं और उनकी जमानत जब्त हो गई है। अब तक पार्टी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नवीन कुमार सिंह उर्फ अभय सिंह का रहा, जो मढ़ौरा विधानसभा क्षेत्र से दूसरे स्थान पर रहे। राजद के जितेंद्र कुमार राय ने यह सीट 27,928 मतों के अंतर से जीती।

प्रशांत किशोर की यह पार्टी जोरदार प्रचार अभियान और बेरोजगारी, पलायन और उद्योगों की कमी जैसे ज्वलंत मुद्दों को उठाने के बावजूद अपने पक्ष में वोट जुटाने में विफल रही। बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव का कहना है कि भारत की इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में बिना राजनीतिक बैकग्राउंड वाले किसी व्यक्ति की एंट्री बेहद मुश्किल ही नहीं लगभग असंभव होती है। प्रशांत किशोर की दाद दी जानी चाहिए कि उन्होंने बहुत मेहनत की। उनकी पार्टी को भले ही बहुत कम वोट मिले लेकिन वह कोने-कोने तक अपनी बात पहुंचाने में कामयाब रहे।

यादव आगे कहते हैं कि इससे एक सबक यह भी मिलता है कि केवल लोगों तक अपनी बात पहुंचाना ही काफी नहीं है। उसे वोट में बदलने के लिए जमीनी संगठन भी जरूरी है। और जन संगठन पेड पॉलिटिकल वर्कर्स के जरिए कभी खड़ा नहीं हो सकता, जैसा कि प्रशांत किशोर ने किया। वेतनभोगी लोगों से राजनीतिक संगठन बनवाना यह इस देश में अभी भी नहीं होता।

जेएसपी के बेहद कम कैंडिडेट्स को 10 प्रतिशत से ज्यादा वोट

बिहार में कई सीटों पर जेएसपी उम्मीदवारों के वोटों की संख्या नोटा (इनमें से कोई नहीं) श्रेणी से भी कम है। फोर्ब्सगंज विधानसभा सीट से जेएसपी उम्मीदवार मोहम्मद एकरामुल हक को मतगणना पूरी होने पर सिर्फ 977 वोट मिले, जबकि नोटा के तहत 3,114 वोट दर्ज किए गए। जेएसपी के ऐसे उम्मीदवार बेहद कम रहे, जिन्होंने 10 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल किए। इनमें चनपटिया सीट से त्रिपुरारी कुमार तिवारी उर्फ मनीष कश्यप शामिल हैं, जिन्हें 24वें चरण की गिनती के बाद 17.2 प्रतिशत मत मिले। मतगणना पूरी होने के बाद जोकीहाट सीट से सरफराज आलम को 16.26 प्रतिशत वोट मिले। भोजपुरी गायक रितेश पांडे भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में असफल रहे और उन्हें केवल 7.45 प्रतिशत वोट ही मिल सके।

बिहार चुनाव के नतीजों से किसे सबसे ज्यादा फायदा, किसे सबसे ज्यादा नुकसान?

प्रशांत किशोर ने पहले दावा किया था कि उनकी पार्टी 150 सीट जीतेगी, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि सीटों की संख्या में या तो पार्टी टॉप पर होगी या सबसे निचले पायदान पर। लेकिन बिहार चुनाव में कोई बीच का रास्ता नहीं है। जेएसपी बिहार के अध्यक्ष मनोज भारती के मुताबिक, “हम एक नई राजनीति शुरू करना चाहते थे और लोगों को बिहार की दुर्दशा के बारे में बताना चाहते थे। हमें शुरुआती दिनों से ही यकीन था कि अगर लोग हमारी बातों को समझेंगे तो हम टॉप पर होंगे नहीं तो सबसे नीचे।”

जन सुराज पार्टी (जेएसपी) ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में कुल वोट शेयर में सीपीआई (एमएल) (एल) से बेहतर प्रदर्शन किया हो सकता है, लेकिन इसका प्रदर्शन एक गहरी कमजोरी को उजागर करता है: NVR24 के विश्लेषण से पता चलता है कि पार्टी ने जिन निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ा, उनमें से लगभग एक तिहाई में नोटा को हराने के लिए संघर्ष किया।

जन सुराज को कुल वोट का 3.44 प्रतिशत मिला, जो सीपीआई (एमएल) (एल) के 3.05 प्रतिशत से आगे था, जिससे यह राज्यव्यापी वोट शेयर रैंकिंग में सातवें स्थान पर रहा। केवल प्रमुख गठबंधनों – राजद (22.76 प्रतिशत), भाजपा (20.87 प्रतिशत), जद (यू) (18.91 प्रतिशत), कांग्रेस (8.46 प्रतिशत) और लोजपा (आरवी) (5.11 प्रतिशत) – के साथ-साथ निर्दलीय (4.66 प्रतिशत) ने अधिक शेयर दर्ज किए।

फिर भी, पहली बार चुनाव लड़ने वाली पार्टी के लिए इस सम्मानजनक वोट पदचिह्न के बावजूद, पार्टी की निर्वाचन क्षेत्र-स्तरीय प्रतिस्पर्धा बेहद कम रही। जिन 238 सीटों पर उसने चुनाव लड़ा, उनमें से केवल 68 पर जन सुराज नोटा से पीछे रहा, यानी सिर्फ़ 28.6 प्रतिशत। दस में से तीन से ज़्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में, “इनमें से कोई नहीं” (NOTA) विकल्प को पार्टी से ज़्यादा वोट मिले।

बिहार के इन 2 हजार लोगों का धर्म क्या है? विश्व का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड कौन सा है? दंतेवाड़ा एक बार फिर नक्सली हमले से दहल उठा SATISH KAUSHIK PASSES AWAY: हंसाते हंसाते रुला गए सतीश, हृदयगति रुकने से हुआ निधन India beat new Zealand 3-0. भारत ने किया कीवियों का सूपड़ा साफ, बने नम्बर 1