प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल के कई बड़े पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. ED का कहना है कि एक छापेमारी के दौरान उसके अधिकारियों के साथ बदसलूकी की गई और सबूत छीन लिए गए. ED ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है.
ED ने बंगाल सरकार पर मारपीट के आरोप लगाए
ED की याचिका में कुल 6 लोगों और संस्थाओं को प्रतिवादी बनाया गया है…
पश्चिम बंगाल सरकार
ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री
राजीव कुमार, DGP
मनोज कुमार वर्मा, कोलकाता पुलिस कमिश्नर
प्रियब्रत रॉय, DCP, साउथ कोलकाता
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)
याचिका में ED ने बताया है कि प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद पुलिस के साथ वहां पहुंच गईं. ED के अधिकारियों ने जो दस्तावेज जब्त किए थे, उन्हें छीन लिया गया. अधिकारियों के लैपटॉप भी जबरन ले लिए गए. ED अधिकारियों को धमकाया गया और उनके साथ मारपीट की कोशिश की गई. ED का आरोप है कि यह चोरी, लूटपाट, डकैती और सबूतों से छेड़छाड़ का साफ मामला है.
राज्य पुलिस से जबरन FIR दर्ज करवाने के आरोप
ED ने यह भी कहा है कि ED अधिकारियों को डराने के लिए राज्य पुलिस से उनके खिलाफ FIR दर्ज करवाई गई है. मामले में राज्य के बड़े पुलिस अधिकारी शामिल हैं और ममता बनर्जी खुद गृहमंत्री भी हैं. इस वजह से ED राज्य पुलिस के पास FIR दर्ज कराने नहीं गई. ED ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह CBI को इस मामले में केस दर्ज करने का आदेश दे. साथ ही, ममता बनर्जी को चेतावनी दी जाए कि वह भविष्य में ऐसी हरकतें न करें.
ED की याचिका में यह भी जिक्र है कि ममता बनर्जी पहले भी केंद्रीय एजेंसियों और यहां तक कि अदालतों पर दबाव बनाने के लिए ऐसी कार्रवाई करती रही हैं. ED का कहना है कि इससे जांच प्रभावित होती है और कानून का उल्लंघन होता है.
ED की तरफ से कुल दो याचिकाएं दाखिल की गई
पहली याचिका ED के नाम पर है, जबकि दूसरी याचिका इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (IPAC) पर छापेमारी में शामिल तीन ED अधिकारियों- निशांत कुमार, विक्रम अहलावत और प्रशांत चंदिला की तरफ से है. यह अधिकारी छापेमारी के दौरान मौजूद थे और याचिका में उनके साथ हुई घटना का जिक्र किया गया है.
ED की याचिका से सियासी हलचल तेज
यह मामला पश्चिम बंगाल में ED की जांच से जुड़ा है, जहां राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर जल्द सुनवाई कर सकता है. ED ने कहा है कि यह जांच की स्वतंत्रता पर हमला है और न्याय की मांग की जा रही है. पश्चिम बंगाल सरकार या ममता बनर्जी की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

