यमन में रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को फांसी दी जाने वाली है. निमिषा पर आरोप है कि उन्होंने एक यमनी शख्स तलाल अब्दो महदी की हत्या की थी. इस खबर की पुष्टि सोशल वर्कर सैमुअल जेरोम बास्करन ने की है, जो यमन की सरकार और निमिषा के परिवार से बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि यमन की पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने जेल प्रशासन को फांसी का आदेश भेज दिया है. हालांकि, अभी भी उम्मीद है कि भारत सरकार मदद कर सकती है और निमिषा की जान बचाई जा सकती है. लेकिन सवाल ये, ये आखिर फांसी के फंदे तक वो पहुंची कैसे? साल 2008 से लेकर अब तक ऐसा क्या-क्या हुआ जो बात यहां तक पहुंच गई. जानिए पूरी कहानी.
कौन हैं निमिषा प्रिया?
निमिषा का जन्म एक साधारण मजदूर परिवार में हुआ था. उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई की और बेहतर कमाई के लिए वो साल 2008 में यमन चली गईं. यहीं उनकी शादी टोमी थॉमस से हुई. उनका परिवार भी यमन में बस गया. वहीं, कम पैसे कमाने से तंग आकर निमिषा और उनके पति ने अपनी क्लिनिक खोलने का प्लान बनाया. लेकिन यमन में विदेशी लोगों को बिजनेस शुरू करने की इजाजत नहीं थी. इसलिए उन्होंने अपने क्लिनिक के लिए यमनी नागरिक महदी से पार्टनरशिप की. औ इसी के बाद से निमिषा की परेशानियां शुरू हो गईं.
पार्टनर ने किया धोखा
महदी ने क्लिनिक के शेयर पर दबाव बनाया और निमिषा को केवल एक छोटा हिस्सा दिया. जब क्लिनिक अच्छा चलने लगा, तो महदी ने निमिषा को उसके हिस्से के पैसे देना बंद कर दिया. जब निमिषा ने इसका विरोध किया, तो उसने उत्पीड़न करना शुरू कर दिया. निमिषा का आरोप है कि महदी ने उनके खिलाफ झूठ फैला दिया और उनकी शादी की फोटो का गलत इस्तेमाल करके, झूठे कागजात बना लिए. इसके साथ ही उन्होंने निमिषा के साथ मारपीट और शारीरिक उत्पीड़न भी किया. यहां तक, महदी को बार-बार जेल भी जाना पड़ा.
वो किस्सा जब हत्या हुई
महदी के पास निमिषा का पासपोर्ट था, इसलिए वह भारत वापस नहीं जा पा रही थीं. वह बार-बार जेल जाकर अपना पासपोर्ट मांगती थीं. फिर जेल के एक अधिकारी ने उन्हें प्लान बताया कि महदी को नशीला दवा देकर बेहोश किया जाए. जिसके बाद पासपोर्ट वापस मिल सकता है. जुलाई 2017 में निमिषा ने ऐसा ही किया. लेकिन चाल उलटी पड़ गई. महदी की ओवरडोज़ से मौत हो गई. बाद में उन्होंने एक साथी नर्स की मदद से शव को टुकड़ों में काटकर पानी के टैंक में फेंकने की कोशिश की. लेकिन तब तक पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया.
भारत सरकार कर रही बचाव की कोशिश
निमिषा को 2020 में मौत की सजा मिली. उन्होंने इसके खिलाफ अपील किया लेकिन वो खारिज हो गई. जिसके बाद भारत में एक संगठन ‘सेव निमिषा प्रिया’ बनाया गया, जो उनकी जान बचाने के लिए काम कर रहा है. इस साल जून में भारत सरकार ने निमिषा की रिहाई के लिए 40,000 डॉलर (₹34,26,000) की मदद मंजूर की. सरकार ने मृतक के परिवार से मुआवजा देने की बातचीत शुरू हुई.
लेकिन यमन के राष्ट्रपति ने हाल ही में निमिषा की मौत की सजा को मंजूरी दे दी है. अब उनकी फांसी तय है. बावजूद इसके, भारत सरकार और समर्थक उनकी जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं.

