बंगाल में चुनाव से पहले बड़ी हलचल, राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने दिया इस्तीफा

CV Ananda Bose Resignation: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने दिल्ली में राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपा. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुए इस इस्तीफे को सियासी गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है, जिससे राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है.

West Bengal Governor Resignation: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने गुरुवार को राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया है. राज्यपाल गुरुवार को दिल्ली में थे. दिल्ली दौरे के दौरान ही सीवी आनंद बोस ने राज्यपाल पद से अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया. प्राप्त जानकारी के अनुसार तमिलनाडु के राज्यपाल सीवी रवि को अस्थायी रूप से बंगाल के राज्यपाल का दायित्व सौंपा गया है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल का इस्तीफा सियासी रूप से काफी अहम माना जा रहा है. राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के बाद सीवी आनंद बोस ने पीटीआई को बताया कि मैंने गवर्नर के ऑफिस में काफी समय बिताया है.

जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति बनने के बाद सीवी आनंद बोस को 23 नवंबर, 2002 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. वह करीब तीन साल पांच महीने तक इस पद पर रहे.

राज्यपाल के तौर पर आनंद बोस शुरू से ही राज्य के कई मुद्दों पर मुखर रहे. वह पश्चिम बंगाल सरकार की ममता बनर्जी की सरकार की नीतियों की लगातार आलोचना करते रहे हैं. उनके कार्यकाल के दौरान, कई मुद्दों पर राज्य और राज्यपाल के बीच टकराव बढ़ गया.

राज्यपाल के इस्तीफे से हैरान हूं… बोलीं ममता दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के गवर्नर सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे की खबर से मैं हैरान और बहुत परेशान हूं.

उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफे के पीछे की वजहें मुझे अभी पता नहीं हैं. हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए, मुझे हैरानी नहीं होगी अगर आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से ठीक पहले गवर्नर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने कुछ राजनीतिक फायदे के लिए दबाव डाला हो. केंद्रीय गृह मंत्री ने अभी मुझे बताया कि आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया जा रहा है. उन्होंने इस बारे में तय रिवाज के मुताबिक मुझसे कभी सलाह नहीं ली.

उन्होंने कहा किऐसे काम भारत के संविधान की भावना को कमजोर करते हैं और हमारे फेडरल स्ट्रक्चर की बुनियाद पर ही हमला करते हैं. केंद्र को कोऑपरेटिव फेडरलिज्म के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए और ऐसे एकतरफा फैसले लेने से बचना चाहिए जो लोकतांत्रिक रिवाजों और राज्यों को कमजोर करते हैं.

रवि अस्थायी राज्यपाल नियुक्त, स्टालिन से रहा है टकराव

आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का अंतरिम गवर्नर बनाया गया है. वे अभी तमिलनाडु के गवर्नर हैं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ उनका टकराव जगजाहिर है. इससे पहले रवि सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी CBI और IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) में थे. पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले एक पूर्व IPS ऑफिसर को अंतरिम गवर्नर का चार्ज दिया जाना अहम माना जा रहा है. पिछले कुछ सालों में आरएन रवि का बीजेपी विरोधी स्टालिन सरकार से कई बार टकराव हुआ है.

पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर उस राज्य के मुख्यमंत्री स्टालिन ने ऐलान किया था कि तमिलनाडु के गवर्नर रवि की टी पार्टी में शामिल नहीं होंगे. उन्होंने इस बारे में एक अधिसूचना जारी किया था. रवि का सीधे नाम लिए बिना अधिसूचना में कहा गया था, “मुख्यमंत्री ऐसे किसी व्यक्ति का न्योता स्वीकार नहीं करेंगे, जो लगातार तमिलनाडु के लोगों के हितों के खिलाफ काम कर रहा है.” अधिसूचना में यह भी कहा गया था कि राज्य के दूसरे मंत्री चेन्नई में राजभवन में शामिल नहीं होंगे.

लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने भी दिया इस्तीफा

लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंद्र गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे उनका नौ महीने का कार्यकाल खत्म हो गया है, जो 18 जुलाई, 2025 को शुरू हुआ था. गुप्ता, जिन्होंने केंद्र शासित प्रदेश के तीसरे LG और इस पद पर बैठने वाले पहले राजनेता के तौर पर इतिहास रचा, ने अपना इस्तीफा ठीक उस समय दिया जब उनकी नियुक्ति के एक साल पूरे होने वाले थे.

गुप्ता के कार्यकाल में क्षेत्रीय दबाव बढ़ता गया, क्योंकि लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जैसे प्रभावशाली ग्रुप्स ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए. इन संगठनों ने लगातार पूर्ण राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों और स्थानीय लोगों के लिए खास रोज़गार कोटा की मांग की है।

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