बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी लिखी है. उन्होंने कहा, मुझे इस बात से गहरा आघात और चिंता हुई है कि निर्वाचन आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान आम नागरिकों को लगातार परेशान करता दिख रहा है. सुनवाई की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी और यांत्रिक हो गई है, जिसमें समझ, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की कमी है. इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग पर उद्दंडता करने का आरोप लगाया है.
सीएम ममता बनर्जी ने चिट्ठी में लिखा, एसआईआर प्रक्रिया लोकतंत्र और संविधान की नींव से जुड़ी है, फिर भी इसमें इंसानियत का अभाव दिखता है. हैरानी की बात है कि जो अभ्यास सकारात्मक और उपयोगी होना चाहिए था, उसमें अब तक 77 लोगों की मौत, 4 आत्महत्या के प्रयास और 17 लोगों के बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होने की खबर है.
उन्होंने कहा कि इसका कारण डर, धमकाना और बिना योजना के काम का अत्यधिक बोझ बताया गया है. यह बहुत शर्मनाक है कि नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. अमर्त्य सेन जैसे 90 वर्ष से अधिक उम्र के सम्मानित विद्वान से भी अपनी पहचान साबित करने को कहा गया. इसी तरह कवि जॉय गोस्वामी, सांसद व अभिनेता दीपक अधिकारी, क्रिकेटर मोहम्मद शमी और भारत सेवाश्रम संघ के महाराज जैसे प्रतिष्ठित लोगों को भी इस असंवेदनशील प्रक्रिया से गुजरना पड़ा.
सामाजिक संवेदनशीलता की कमी, असली मतदाताओं का अपमान
उन्होंने कहा कि यह ईसीआई की तरफ से खुली उद्दंडता नहीं तो और क्या है? ये तो सिर्फ कुछ उदाहरण हैं, ऐसे बहुत लोग हैं जिन्हें इसी तरह परेशान किया गया. शादी के बाद ससुराल जाकर उपनाम बदलने वाली महिला मतदाताओं को भी पहचान साबित करने के लिए बुलाया जा रहा है. यह सामाजिक संवेदनशीलता की कमी को दिखाता है और महिलाओं व असली मतदाताओं का अपमान है. क्या एक संवैधानिक संस्था आधी आबादी (महिलाओं) के साथ ऐसा व्यवहार करती है?
आम नागरिकों को देशद्रोही बता रहे हैं कुछ ऑब्ज़र्वर
अपने पत्र में उन्होंने आगे लिखा, ऑब्ज़र्वर और माइक्रो-ऑब्ज़र्वर को बिना किसी ट्रेनिंग के खास और संवेदनशील काम के लिए लगाया जा रहा है. उनमें से कई अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहे हैं. ऐसी परेशान करने वाली रिपोर्ट्स हैं कि कुछ ऑब्ज़र्वर आम नागरिकों को देशद्रोही बता रहे हैं. उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राज्य से इन तथाकथित ऑब्ज़र्वर को सुरक्षा देने की उम्मीद कर रहा है. ऐसे समय में जब पुलिस पहले से ही गंगासागर मेले के लिए भारी संख्या में तैनात है. उसका मुख्य कर्तव्य आम नागरिकों की रक्षा करना है न कि इन ऑब्ज़र्वर को सुरक्षा देना. यह भी पता चला है कि तथाकथित लॉजिकल गड़बड़ियों को, जो असल में इलॉजिकल हैं, कुछ ही निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक पक्षपात के साथ जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है.

