केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बुधवार से तीन दिवसीय बिहार दौरे पर हैं. इस दौरान वे राज्य के अधिकारियों और सशस्त्र सीमा बल (SSB) व अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक करेंगे. बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा वाले संवेदनशील जिलों में कथित जनसांख्यिकीय बदलाव, घुसपैठ और अवैध धार्मिक निर्माणों से जुड़ी समस्याओं का विश्लेषण करना है.
उच्च स्तरीय समिति का गठन
अमित शाह ने बताया कि जनसांख्यिकीय बदलावों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, जो पूरे देश में हुए बदलावों पर रिपोर्ट तैयार करेगी. उन्होंने कहा कि सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बंगाल, झारखंड और बिहार हैं. शाह ने कहा कि जनसंख्या के अस्वाभाविक बदलाव किसी भी देश की संस्कृति, इतिहास और भूगोल के लिए खतरा होते हैं.
बंगाल चुनाव और बीजेपी का एजेंडा
शाह ने कहा कि बंगाल में अभी चुनाव हैं और उनका पूरा विश्वास है कि इस बार भाजपा की सरकार बनेगी. उन्होंने कहा कि नई सरकार का पहला काम सीमा पर बाड़ का काम पूरा करना और एक-एक घुसपैठिए को बाहर करना होगा. उन्होंने कहा कि यह कोई चुनावी वादा नहीं बल्कि केंद्र की मोदी सरकार का संकल्प है.
शाह ने कहा कि अगली बार जब हम आपके पास जनादेश के लिए आएंगे उससे पहले एक-एक घुसपैठियों को देश के बाहर निकाल कर आएंगे. एक तरह से अमित शाह ने यह ऐलान किया है कि 2030 तक सभी घुसपैठियों को देश के बाहर निकाल देंगे.
सीमांचल से घुसपैठियों को हटाना
बिहार के अररिया में नेपाल सीमा से सटे लेटी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने SSB की 52वीं बटालियन के BOP भवन का उद्घाटन किया और सीमा सुरक्षा परियोजनाओं की समीक्षा की. इस दौरान, SSB के कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि सीमांचल को घुसपैठियों से मुक्त किया जाएगा. उन्होंने कहा कि घुसपैठियों से गरीबों के अनाज और देश के नौजवानों के रोजगार पर असर पड़ता है. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इन लोगों को बाहर करना जरूरी है.
कार्रवाई की रूपरेखा
अमित शाह ने बताया कि बिहार की सरकार से लेकर जिलाधिकारी और पुलिस कप्तानों तक के साथ डिटेल मीटिंग करके एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सीमा से 10 किमी के भीतर जितने भी अवैध अतिक्रमण हैं, उन्हें हटा दिया जाएगा.

