कोच राहुल द्रविड़ का हनीमून पीरियड खत्म, अब कड़े फैसले लेने की जरूरत

केपटाउन वनडे मैच के तनाव वाले लम्हों के दौरान जब दीपक चाहर (Deepak Chahar) अपने बल्ले से लगभग हारे हुए मैच का नतीजा बदलने की जद्दोजेहद में जुटे हुए थे तो टीवी कैमरा ने अचानक ही टीम इंडिया के कोच राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) पर फोकस किया. द्रविड़ जो अपने खेल जीवन के दौरान या रिटायरमेंट के बाद भी अपने चेहरे के भाव को किसी के सामने जाहिर नहीं होने देते, वह भी काफी उत्साहित होकर चाहर को ‘कम ऑन, कम ऑन’ कह रहे थे. शायद ये लम्हा इस बात को कहने के लिए काफी है कि टीम इंडिया के पूर्व कप्तान द्रविड़ भी अब समझ चुके हैं कि कोच के तौर पर उनका हनीमून पीरीयड अब खत्म हो गया है.

15 साल बाद साउथ अफ्रीका में द्रविड़ के लिए फिर वही नतीजे!

जिस साउथ अफ्रीका दौरे की शुरुआत उन्होंने सेंचुरियन टेस्ट में जीत के साथ की, उसके बाद अगले 2 टेस्ट और फिर तीन वनडे में उनकी टीम को लगातार 5 हार का सामना करना पड़ा. एक तरह से कप्तान के तौर पर 2006 के साउथ अफ्रीका दौरे के बुरे दौरे को फिर से याद करना पड़ा जब उनकी टीम ने पहला टेस्ट जीता था लेकिन उसके बाद अगले दो टेस्ट हारे. इस दौरे के विपरीत, उस दौरे पर वनडे सीरीज टेस्ट सीरीज से पहले खेली गई थी लेकिन वहां पर भी टीम को हार का ही सामना करना पड़ा था. बिना कोई मैच जीते वो सीरीज खत्म करके आए थे.

ये सच है कि राहुल द्रविड़ इस वक्त टीम इंडिया के हेड कोच बनने के लिए बहुत उत्साहित नहीं थे लेकिन, जब उन्हें सौरव गांगुली ने किसी तरह से समझा-बुझा कर मना लिया तो उनकी शुरुआत अच्छी रही. शिखर धवन की कप्तानी में जब ‘इंडिया ए’ जैसी टीम ने आसानी से सीरीज जीत ली (वनडे और टी20 दोनों में) तो ये कहा जाने लगा कि भारत के पास ऐसा रिजर्व बेंच है कि वो एक साथ हर फॉर्मेट के लिए अलग अलग भारतीय टीम उतार सकता है. चूंकि, उस वक्त विराट कोहली और उनके अहम साथी खिलाड़ी इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज में शानदार खेल दिखा रहे थे तो इस बात को फैंस और जानकारों ने बेहद आसानी से मान लिया.

सिर्फ 6 महीने के भीतर ही जब एक थोड़े बेहतर (दक्षिण अफ्रीका बहुत मजबूत टीम नहीं है फिलहाल वनडे क्रिकेट में और उन्होंने अपने कई खिलाड़ियों को वनडे सीरीज में आराम दिया था और कुछ फिटनेस की वजह से भी नहीं खेल पाए थे) टीम के खिलाफ भिड़ी तो बस दिन में ही इस टीम को तारे नजर आने लगे. एक रोहित शर्मा टीम में नहीं दिखे तो मानो की पूरी टीम का संतुलन ही बिगड़ा नजर आया.

गागुंली-कोहली विवाद की आग को बुझा सकते थे द्रविड़?

ऐसे ही हालत में कोच द्रविड़ की भूमिका अहम हो जाती है. बोर्ड अध्यक्ष गांगुली और कोहली के बीच जो कुछ हुआ उसकी जानकारी तो कम और ज्यादा हर किसी को है लेकिन इस पूरे मसले ने कोच द्रविड़ को शायद बैकफुट पर धकेल दिया. कोच द्रविड़ खुलकर अपने पूराने साथी और पूर्व कप्तान गांगुली के रवैये पर कुछ नहीं बोल पाये तो वह कोहली जैसे कप्तान को भी संभालने में नाकाम ही रहे.

आखिर, कोई ना कोई ये सवाल तो द्रविड़ से पूछेगा ही ना जो कोहली वनडे क्रिकेट में भी कुछ हफ्ते पहले तक कप्तानी करने को बेकरार थे उन्होंने अचानक ही टेस्ट सीरीज हारने के बाद कप्तानी से तौबा कर ली और द्रविड़ कोच के तौर पर कुछ नहीं कर पाए! मतलब ये है कि जिस द्रविड़ को क्रिकेट की हर पीढ़ी से असाधारण सम्मान हासिल होता है वो अपने रुतबे और साख का फायदा उठाते हुए गागुंली और कोहली के बीच लगी आग को बुझाने का प्रयास तक नहीं कर पाये? वैसे, ये सब कुछ हमेशा न्यूट्रल रहने वाले द्रविड़ के लिए नया नहीं है.

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आपमें से बहुत लोगों को ये बात याद होगी कि कैसे जब 2005-07 वाले दौर में टीम इंडिया सौरव गागुंली बनाम हेड कोच ग्रेग चैपल के खेमे में बंट गई थी, वहां पर भी द्रविड़ कप्तान के तौर पर नीरो जैसी भूमिका में अपनी बांसुरी बजाने में मग्न थे लेकिन हैरानी की बात है कि द्रविड़ की उस भूमिका की तुलना इससे पहले किसी ने नीरो से नहीं की थी!

6 महीने से कम समय में 5 कप्तानों से कोच की मुलाकात!

श्रीलंका दौरे पर द्रविड़ को कप्तान के तौर पर धवन मिले तो न्यूजीलैंड के खिलाफ कानपुर में अंजिक्या रहाणे और मुंबई में कोहली. रोहित के साथ वो टी20 सीरीज न्यूजीलैंड के साथ शामिल हो चुके थे और फिर साउथ अफ्रीका में उन्हें अचानक ही के एल राहुल के साथ तालमेल बिठाने की आवश्यकता पड़ी. ये वही के एल हैं जो द्रविड़ के इतने बड़े मुरीद कि उनके पिता ने राहुल नाम उन्हीं से प्रेरित होकर रख दिया. लेकिन, पहले दौरे और पहली सीरीज में दोनों राहुल का तालमेल और साझेदारी भारतीय क्रिकेट के लिए सिर्फ मायूसी लेकर आई.

द्रविड़ के लिए अब समय काफी तेजी से भागता हुआ..

ये सच है कि द्रविड़ का कोच के तौर पर करार दो साल का है लेकिन अब समय उनके लिए काफी तेजी से भागता हुआ दिखने लगा है. इस साल अक्तूबर में होने वाला टी20 वर्ल्ड कप उनका कोच के तौर पर सबसे बड़ा इम्तिहान होगा क्योंकि उस टूर्नामेंट का कार्यक्रम सबके सामने आ चुका है जहां इत्तेफाक़ से पहले मैच में टक्कर पाकिस्तान से ही होनी है जैसा कि 2020 वर्ल्ड कप में हुआ था. लेकिन, उससे पहले जुलाई में द्रविड़ को इंग्लैंड के खिलाफ इकलौता टेस्ट जीतना होगा जिससे 2-1 की बढ़त को सीरीज जीत में बदला जा सके. आखिरी बार 2007 में द्रविड़ की ही कप्तानी में टीम इंडिया ने इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीती थी.

आगे का इम्तिहान और मुश्किल हो सकता है अगर…

आईपीएल से पहले वेस्टइंडीज और श्रीलंका के खिलाफ भारत में होने वाले मैच कोच के तौर पर द्रविड़ के विजन की झलक दें सकते हैं. आईपीएल खत्म होने के एक महीने बाद साउथ अफ्रीका की टीम फिर से भारत के खिलाफ खेलेगी लेकिन इस बार मुकाबले भारत में होंगे. अगर द्रविड़ ने कोच के तौर पर सफेद गेंद की क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखते हुए चयनकर्ताओं के साथ कड़े फैसले नहीं लिए तो हो सकता है कि अफ्रीकी टीम जनवरी 2022 के नतीजों को जून 2022 में भी दोहरा दे. औ अगर ऐसा हुआ तो कोच के लिए आगे का इम्तिहान और मुश्किल होता चला जा सकता है.

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